आ बेटी तेरे लाड़ करूं मनै बेटे तैं भी प्यारी Aa beti tere lad kru mane bete t bhi pyari

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प्रिय दोस्तों, जब सावित्री घर पहुंच कर अपनी सास के चरण लेती है तो उसकी सास उसको आशीर्वाद देती हुई क्या कहती है आइये इस रागनी को पढ़कर मालूम करें...

पायां कै म्हां लोट गई झट सासू ने पुचकारी
आ बेटी तेरे लाड़ करूं मनै बेटे तैं भी प्यारी।टेक
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ज्ञान बिना संसार दुखी दुख पड़ता है सहना Gyan bina sansar dukhi dukh padta sahna

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प्रिय दोस्त, अज्ञानी व्यक्ति पूरी जिन्दगी भटकता रहता है, वो जो भी कार्य करता है उसकी अज्ञानता उसे उस कार्य में कामयाब नहीं होने देती और उसे नुकसान ही सहना पड़ता है. ज्ञान के बिना इन्सान किस प्रकार दुखी रहता है ये सब जानने के लिए आइये लख्मीचंद जी की लिखी पंक्तियाँ पढ़ते है...

हाथ जोड़ कै अर्ज करूं पूत दे दियो मेरा Hath jod k arj karu su put de diyo mera

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यह रागनी गोपीचंद भरथरी के किस्से से ली गई है. यह उस समय की बात है जब गोपीचंद की माता गोपीचंद को अमर करने के लिए अपने भाई भरथरी से जोग दिलवा देती है लेकिन बाद में जब उसे महल सुना दिखाई देता है तो वह अपने पुत्र की पुनः मांग करती है.....

एक चिड़िया के दो बच्चे थे - रागनी Ek chidiyan ke 2 bachche the - Ragni

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प्रिय दोस्तों, यह रागनी रूप और बसंत के किस्से से ली गई है, इसमें रूप - बसंत की माँ मरने से पहले अपने पति से चिड़ियाँ का उदाहरण देती हुयी कहती है कि मेरी मृत्यु के पश्चात आप दूसरा विवाह मत करना क्योंकि सौतेली माँ मेरे बच्चों को प्यार नहीं दे पाएगी और वो मेरे बच्चों का जीना मुश्किल कर देगी.....

लाख चौरासी जीया जून मैं नाचै दुनिया सारी Lakh chorasi jiya jun me nache duniya sari

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नाचने-गाने का और लखमीचंद के सांगों का विरोध भी बहुत होता था, क्योंकि उन दिनों में आर्यसमाज का प्रभाव बहुत बढ़ गया था । आत्मविश्वासी पंडित जी ने विरोधों का जमकर मुकाबला किया । पुरुषों द्वारा स्त्रियों का भेष धारण करने की सफाई देते थे : इन मर्दों का के दोष भला धारण में भेष जनाना । इस बारे में उनकी यह रागनी पेश है....