सोना कहण लगा लोहे तै तू सब धातां में काला Sona kahan lagya lohe t tu sab dhata m kala

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प्रिय दोस्त, इस रागनी के माध्यम से कवि बतलाना चाहता है कि हर किसी की किस्मत अलग - अलग होती है, दुनियां में हर किसी का होना जरुरी है, सबका अपना - अपना महत्त्व है, इन्सान हो या वस्तु सब महत्वपूर्ण है, हमें अपने आपको ज्यादा बड़ा नहीं समझना चाहिए, आइये इस रागनी से जानकारी लें....

दुनिया भर की लावैं बुराई और दूसरा काम नहीं Duniya bhar ki lyave burai or dusra kaam nahi

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प्रिय दोस्त, आज समाज में भाई-चारा बिलकुल ही नहीं रहा है, इस विषय में आइये जाने कवि क्या कहता है-

पूत सुपात्र सपुत एक भतेरा चाहिएं बीस कुजाम नहीं।
दुनिया भर की लावैं बुराई और दूसरा काम नहीं।टेक

साथ रहणियां संग के साथी दया मेरे पै फेर दियो Sath rahniya sang ke sathi dya fer diyo

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प्रिय दोस्त, फौजी दिन रात हमारी रक्षा करते है, वे गर्मी - सर्दी में बोर्डर पर खड़े पहरा देते रहते है, अपने परिवार से कोसों दूर रहते है, गोलियों से इनका सीना छन जाता है, ये भी किसी के बेटे है, किसी बहन के भाई है, किसी बेटा - बेटी के पिता है और किसी औरत के पति है। एक बार एक फौजी अपने अंत समय में क्या कहता है, इस रागनी में पढ़िए.....

होगे मर्द गुलाम बीर के घर मैं राज लुगाई का hoge mrd gulam bir ke ghar m raj lugai ka

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प्रिय दोस्त, आज का समाज पूरा बदल चूका है, पहले समय में माता-पिता, बहन-भाई तथा अन्य सभी बड़ो का आदर किया जाता था उनका कहना मानते थे लेकिन अब सभी इन बातों को भूल चुके है, आइये आज इनसे जुड़ी एक रागनी पढ़ते है जिसमे कवि ने आज के समाज का खुलासा किया है....

देर सै अन्धेर नहीं उस पणमेशर के घर में Der s andher nahi us panmeshvar ke ghar m

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प्रिय दोस्त, आइये आज मेहर सिंह की एक शिक्षाप्रद रागनी पढ़ते है...

देर सै अन्धेर नहीं उस पणमेशर के घर में
चोर जार ठग बदमाशां कै तै जुत लागते सिर मैं।टेक