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बहादुर बच्चों की कहानियाँ Bahadur bachcho ki kahaniyan

The story of the bravery of children, बहादुर बच्चों की कहानियाँ Bahadur bachcho ki kahaniyan.

आज देश उन बहादुर बच्चों को सलाम करता है तथा उनकी बहादुरी की सराहना करता है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर सच्ची मानवता का फर्ज निभाया।
 

इन बच्चों को प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस पर सम्मानित किया जाता है। सन् 1957 से यह पुरस्कार देश के वीर नौनिहालों को प्रदान किए जा रहे हैं। अब तक 756 बच्चों को यह पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है, जिनमें 541 लड़के और 215 लड़कियाँ शामिल है। More

आपने अपने घरों में बच्चों को टीवी पर सुपरहीरोज का एक्शन देखकर खुश होते देखा होगा लेकिन इन बच्चों से कुछ ऐसे कारनामे कर दिखाए हैं कि इन्हें लिटिल सुपरहीरो का तमगा देना गलत नहीं होगा। तो आइए, सुनते हैं रियल वर्ल्ड के इन नन्हें सुपरहीरोज की कहानियां को. More

बहादुरी न उम्र की मोहताज होती है और न ही लिंग की. हमारे देश में बहादुर महिलाओं ने तो वो कर दिखाया है जिसकी मिशाल दी जाती है. इस समय ऐसी ही 14 साल की एक बहादुर लड़की की चर्चा असम में चारों तरफ हो रही है, जिसने हथियारबंद किडनैपर से 10 बच्चों की जान बचाने के लिए खुद को उसके हवाले कर दिया. यह घटना बुधवार को शिवसागर जिले के सिमालुगुड़ी में हुई. असम और नागालैंड के घने जंगल के बीचों-बीच 14 घंटों तक किडनैपर की गिरफ्त में रहने के बाद यह लड़की भाग निकली और चाय के बागानों तक पहुंच गई. More

दंतेवाड़ा देश का ऐसा जिला है जहां नक्सली बंदूकें वर्षों से गरज रही हैं. नक्सलियों का गढ़ बन चुके इस इलाके में औसतन दो दिन में एक मौत होती है और यहां अफसर से लेकर नेता तक कोई सुरक्षित
नहीं है. इसी जिले में एक गांव है नकुलनार. दो साल पहले गांव की एक बिटिया अंजली सिंह गौतम (15वर्ष) ने वीरता दिखाई और प्रधानमंत्री के हाथों 2010 में बापू गैधानी वीरता पुरस्कार हासिल किया. साहस के साथ-साथ उसका दिल देखिए कि पुरस्कार के तौर पर मिली 24 हजार रूपये की राशि को उसने गरीब बच्चों के आश्रम के लिए दान कर दिया..! More

साहस और वीरता की कोई उम्र नहीं होती. हर साल की तरह इस साल भी गणतंत्र दिवस के मौके पर साहस वीरता पुरस्कार से सम्मानित बच्चों ने यह साबित कर दिखाया है. आईये इस अंक में हम इन वीरता के सच्चे सारथियों के बारे में जानते है की कैसे इन बच्चों ने दूसरों के संकट में फसें जीवनरथ को अदम्य साहस से हांक कर बाहर निकाला. More

कहानी नहीं बल्कि सच्ची घटना है यह रायपुर की , जहाँ बड़े बड़े मारे डर के काँप उठते हैं वहीं एक दस वर्षीय बच्ची शीतल की हिम्मत ने न केवल अपनी माँ को लुटने से बचाया बल्कि लुटेरों को भी पुलिस के हवाले करा दिया। More

छोटे शहरों के बच्चों के बड़े कारनामे
प्रतिभाएं शहरों और पैसों की मुहताज नहीं होतीं. यकीन नहीं आता तो पढि़ए सफलता के नए किस्से लिए इन बच्चों की दास्तां. More

MHB2013

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