हरियाणा के दार्शनिक स्थल Haryana ke darshanik sthal

Haryana ke darshanik sthal. हरियाणा के दार्शनिक स्थल। Tourist Places in Haryana.

हरियाणा के नाम का अर्थ है  "परमेश्वर का निवास" । हमारे महान महाकाव्‍य महाभारत में हरियाणा की चर्चा हुई है।

जैसा कि बहुत से लोग जानते हैं कि कौरवों और पांडवों की युद्धभूमि  कुरूक्षेत्र हरियाणा में ही है। यह राज्य उत्तर भारत का एक राज्य है जिसे 1966 में पंजाब से अलग कर के बनाया गया था। पंजाब और हरियाणा की  राजधानी चंडीगढ़ है।

मैं यहाँ पर हरियाणा के कुछ धार्मिक स्थलों के बारे में लिख रहा हूँ।

हथीरा देवी का मंदिर
पांडवों द्वारा कुरुक्षेत्र में धर्मरक्षा और न्याय के लिए महाभारत का भीषण युद्ध लड़ा गया। इस युद्ध में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सुदर्शन चक्रधारी भगवान श्रीकृष्ण की थी। उन्होंने प्रत्येक विषम परिस्थिति से पांडवों को सचेत करके उनका मार्गदर्शन किया। वे जानते थे कि यह इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध होगा। पांडवों ने कुरुक्षेत्र में माता की पिंडी स्थापित करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस स्थान का नाम उन्होंने हस्तिपुर रखा। तत्पश्चात् देवी बाला सुंदरी के प्रसाद के रूप में पांडवों को विजय प्राप्त हुई। उसी स्थान पर माता के मंदिर का निर्माण किया गया। माता को अब हथीरा देवी के नाम से भी जाना जाता है। इस बात का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है।




ज्योतिसर
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जहां पर गोविंद ने अपने मोहग्रस्त सखा पार्थ (अर्जुन) को गीता ज्ञान प्रदान करके अपने विराट रूप के दर्शन करवाए वह स्थान आज भी ज्योतिसर के नाम से जाना जाता है। ज्योतिसर अर्थात् प्रकाश का सरोवर। वह ज्ञान रूपी प्रकाश जो श्री गीता जी के माध्यम से मनुष्य सभ्यता को प्राप्त हुआ। हरियाण प्रदेश के कुरुक्षेत्र नगर से लगभग आठ कि.मी. की दूरी पर पेहवा मार्ग पर विराजमान यह तीर्थ भारत के प्रमुख तीर्थों में सम्मिलित है। शांत व सुरम्य वातावरण से परिपूर्ण इस तीर्थ की परिधि में प्रवेश करते ही अद्भुत मानसिक शांति का अनुभव होता है।




बद्री-केदार मंदिर
यमुनानगर जिले के कपाल मोचन से करीब 15 किलोमीटर व बिलासपुर गांव से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर हिमालय की शिवालिक की पहाड़ियों के बीच सिंधुवन में स्थित आदिबद्री नाम से प्रसिद्ध ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को भगवान बद्रीनाथ के प्राचीन निवास स्थान और सरस्वती नदी के उद्गम स्थल के रूप में जाना जाता है।



शेखचिल्ली का मकबरा
थानेसर में शेखचिल्ली का बड़ा ही खूबसूरत मकबरा मौजूद है। चिल्ली अपने समय के बड़े सूफी संतों में से एक थे, जिन्हें अब्द उर्र रहीम, अलैस अब्द उइ करीम, अलैस अब्द उर्र रज्जाक के नाम से भी जाना जाता  था। यह मुगल बादशाह और औरंगजेब के बड़े भाई दारा शिकोह के आध्यात्मिक गुरु भी थे। मकबरे का निर्माण पर्शियन स्थापत्य कला के प्रभावित है।



शेखचिल्ली के मकबरे के अलावा यहां देखने योग्‍य एक और भवन है। मध्‍यकाल में यह मदरस था। यह एक भव्‍य भवन है। इस भवन में एक बड़ा सा आंगन है जिसके साथ एक बाग है। इस आंगन के चारों तरफ कमरे बने हुए हैं। इन कमरों के दरवाजे आर्क शैली में बने हुए हैं। वर्तमान में यह भवन एक संग्रहालय के रुप में परिणत हो चुका है। इस संग्रहालय की दो गैलरी क्रमश: कुरुक्षेत्र और भगवानपुर को समर्पित है। इन गै‍लरियों में इन स्‍थानों से खुदाई से प्राप्‍त सामान रखे गये हैं।

हर्ष का टीला
मदरसे की छत पर जाने पर बगल में एक खुदी हुई जगह दिखती है। खुदाई से निकली वस्‍तुओं के आधार पर यह पता चला कि ये वस्‍तुएं हर्षकाल की हैं। इस टीले को हर्ष का टीला कहा जाता है। शेख चिली का मकबरा और मदरसा दोनों इसी टीले पर स्थित हैं। इसी कारण यह दोनों स्‍थल बाकी शहर से ज्यादा ऊँचे दिखते है।




थानेश्वर महादेव मंदिर
थानेश्वर में थानेश्वर महादेव मंदिर है जहां पांडवों ने भगवान शिव की आराधना कर महाभारत के युद्ध में कौरवों पर जीत प्राप्त की थी। भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और मनोकामना पूरी होने का वरदान भी दिया था। इस मंदिर की बड़ी मान्यता है। इस प्राचीन मंदिर के लिए कहा जाता है कि स्वयं भगवान शिव यहां वास करते हैं और महाशिवरात्रि की रात को तांडव करते हैं।

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