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बिमारी दूर करने के घरेलु तरीके Bimari dur karne ke gharelu tarike

Bimari dur karne ke gharelu tarike. बिमारी दूर करने के घरेलु तरीके। Ways to avoid sickness at home.

आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। यह अथर्ववेद का विस्तार है। यह विज्ञान, कला और दर्शन का मिश्रण है।

‘आयुर्वेद’ नाम का अर्थ है, ‘जीवन का ज्ञान’ - और यही संक्षेप में आयुर्वेद का सार है। यह चिकित्सा प्रणाली केवल रोगोपचार के नुस्खे ही उपलब्ध नहीं कराती, बल्कि रोगों की रोकथाम के उपायों के विषय में भी विस्तार से चर्चा करती है। 


नेत्र की बिमारी दूर करें-

एक कप गाजर का रस, एक कप पालकी का रस और उसमें एक कागजी नीबू का रस डालकर प्रातः खाली पेट एक माह तक पिएँ। इससे आँखें निरोग रहती है, मस्तिष्क पुष्ट बनता है। आँखों से चश्में से छुटकारा मिलता है। यह प्रामाणिक है।

पेट की बिमारी दूर करें-

50 ग्राम मुली का बीज लेकर उसे 500 ग्राम पानी में उबालें। पानी जब आधी रह जाय तो उसे छान कर (पानी) पी लें। ऐसा एक माह तक लगातार करें तो पेट की पुरानी बीमारियाँ जड़ से ख़त्म होकर नया जीवन मिल जाता है।

पत्थरी का इलाज यूँ होता है-

हिंदी में करंज, बंगला में डलहंज, मराठी में चापड़ा और गुजराती में कंजहो कहा जाता है। यह वनस्पति किसी भी तरह के पत्थरी को जड़ से ख़त्म करने में अद्दभुत औषधि है। इसे प्राप्त कर इसका उपरी हिस्सा उतार दें। अन्दर का चूर्ण एक मासा लेकर तीन मासा शहद के साथ रोगी को चटाएं।

दूसरे दिन 2 मासा, तीसरे दिन 3 मासा रोगी को चटाएं। अर्थात 11 दिन तक औषधि बढ़ाते रहें। आगे 11 दिन तक घटाते चले जाएं।

कुल 21 दिनों में पत्थरी समाप्त।