हर रोज व्यायाम करने के फायदे Har roj vyayam krne ke fayde

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औरतोका स्वभाव कैसा हो जाता है जो अपना घर छोडके ससुरालमे आजाते है जीससे उनके अपने हर तरहसे उनके दिलमे सदाके लिये बस जाते है। उनका ध्यानभी जैसे यहासे विदेश गया हुवा कोइ एक छोटा बच्चा जो अपनी पढाइतो पूरी करली पर अभी इतना बडा नही हुवाके अपने काम अच्छी तरहसे अपने दमपे संभाल शके जीससे अपने पैरों पर खडा हो सके। पर इसमे सबसे अच्छी बात ये हैके हर मनुष्य अपने ईश्वर अंश जीव अविनाशीके ईश्वरके घरसे आता है पर वह रंग जाता है इस संसारमे और भुल जाता है वह असलमे कौन है और कहासे आया है जीससे उसे मौतभी याद नही करा शक्ति वह कौन है और कहासे आया है जबतक कोइ अभ्यासी गुरु जो इस नाशवंत शरीरमे रहता जरुर है पर नश्वर देहसे परे उस ईश्वरको जान लिया और उसमेही मिल गया और अपनी असली जात क्या है मै यह देह नही पर ईशवर अंश जीव अविनाशी हुँ चेतन वह खुद है आत्मा-परमात्मा जीससे सारा जग चलायमान है हम नहि। ऐसा जरुर प्रतीत होता है य सारा जग चलायमान है पर असलमे आत्मा और परमात्मा न कभी हिले ना डुले वह तभी से ही स्थिर है जब वही था है और रहेगा उसके दम पर सारा जग हिलता डूलता दिखाइ देता है पर वह कभीभी नहि हिलते उसका सिधा सिधा प्रमाण है हमारा चित्तजो स्थिर रहे तो ही हमारे काम कुशल मंगल पार होते है और ज्ञानीओने उस चेतन, चैतन्य स्वरूप आत्मा परमात्माका वर्णनभी किया तो यही कहा अपने शब्दोमे के वह सत्त चित्त आनंद स्वरूप है। हसत्त-चित्त-आनंद स्वरूप हमारा परम प्राणसेभी प्यारा । जीसे लोग कुछ ऐसी भाषाका उपयोग करते हैके मुझे जाग्रती हो गइ पर असल भाषा ये है की वह जाग्रत हो गया वह मनुष्य मिट गया और असल स्वरुपमे आगया नश्वर देह रहते इस नाशवंत शरीरके अणु अणुपे उसकीही सत्ता है वह जहनमे अनुभवमे आ गया जीससे वह अन्जानथा वह खुद परमात्माही सारी की सारी अस्तित्वका मालीक नजर आगया अब क्या नजरभी उसकी या यु कहो वही रहा और मैं मिटा ॐ नमः ईति संपुर्ण रामायण महाभारत जिन्दगीकी जै हो आत्मज्ञानी सद्गुरुदेवकी जै हो जै हो जीनका रूप दिखता जरुर है पर वह अंदरसे टस से मस नही होते अपने ध्यानसे सदंतर चलती रहती भक्ति आत्मा परमात्मा जो हर कीसीमे है वह अपने आपको सभीमे देखते है। वस्तु गते सो एक है यामे कछुए भिन्न नहि । पाणी, पवन ने जड उपवनमां अजब तमारी माया जोई भला भला भरमाया......छे गजब तमारी माया जो इससे बचना होतो मत भुलो ये माया हमारी माँ है और बिना शरीर नाम रूपवाला भगवानही हमारा आत्मा सो ही परमात्मा है। देह अभ्याश छोडतेही आत्म अभ्याश शुरु हो शकता है या फिर अपने आप ईश्वर कृपा हो शक्ति है आत्म भक्ति ।

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Vyayam ke bare me kafi achhi jankari hai.

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thank u khup chan. vijay 8424825771. vijrisbud@gmail.com

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