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पढियें महापुरुषों के अनमोल शब्द - Padhiyen Mahapurushon ke anmol shabd

Mahapurushon ke anmol shabd (vachan). महापुरुषों के अनमोल शब्द. Precious words of great men.

प्रिय मित्र इस पोस्ट में आप महापुरुषों द्वारा कहे गए अनमोल शब्दों को पढ़ सकते हो. ये शब्द बहुत समय पहले कहे गए है और ये आज भी महत्वपूर्ण है.


महापुरुषों के अनमोल शब्दों की लिस्ट :-
  1. वाणी के बजाय कार्य से दिए गए उदाहरण कहीं ज्यादा प्रभावी होते हैं - अज्ञात
  2. मनुष्य का पतन कार्य की अधिकता से नहीं वरन कार्य की अनियमितता से होता है - अज्ञात
  3. कायर आदमी अपनी मौत से पहले न जाने कितनी बार मरता है - अज्ञात
  4. खुशियों को दामन में भरने पर वह थोड़ी सी लगती हैं, लेकिन यदि उन्हें बांटा जाये तो वे और ज्यादा बड़ी नजर आती हैं - अज्ञात
  5. दो की दोस्ती में एक का धर्य जरुरी है अज्ञात क्रोध ऐसी आँधी है जो विवेक को नष्ट कर देती है - अज्ञात
  6. हर आदमी कहता है की मैं अच्छा हूँ, लेकिन लोग क्या मानते हैं यह महत्वपूर्ण है - अज्ञात
  7. जो सभी का मित्र होता है वो किसी का मित्र नहीं होता - ओशो
  8. सत्य से कीर्ति प्राप्त की जाती है और सहयोग से मित्र बनाए जाते हैं - कौटिल्य अर्थशास्त्र
  9. हज़ार योद्धाओं पर विजय पाना आसान है, लेकिन जो अपने ऊपर विजय पाता है वही सच्चा विजयी है - गौतम बुद्ध
  10. अकर्मण्यता के जीवन से यशस्वी जीवन और यशस्वी मृत्यु श्रेष्ठ होती है - चंद्रशेखर वेंकट रमण
  11. यदि मार्ग काँटों भरा हो, और आप नंगे पांव हो तो रास्ता बदल लेना चाहिए - चाणक्य 
  12. ब्रह्माज्ञानी को स्वर्ग तृण है, शूर को जीवन तृण है, जिसने इंद्रियों को वश में किया उसको स्त्री तृण-तुल्य जान पड़ती है, निस्पृह को जगत तृण है - चाणक्य
  13. पुरुषार्थ से दरिद्रता का नाश होता है, जप से पाप दूर होता है, मौन से कलह की उत्पत्ति नहीं होती और सजगता से भय नहीं होता - चाणक्य
  14. मेहनत करने से दरिद्रता नहीं रहती, धर्म करने से पाप नहीं रहता, मौन रहने से कलह नहीं होता - चाणक्य
  15. मनुष्य का सबसे बड़ा यदि कोई शत्रु है तो वह है उसका अज्ञान - चाणक्य
  16. जिस प्रकार जल कमल के पत्ते पर नहीं ठहरता है, उसी प्रकार मुक्त आत्मा के कर्म उससे नहीं चिपकते हैं - छांदोग्य उपनिषद
  17. अपने को संकट में डाल कर कार्य संपन्न करने वालों की विजय होती है, कायरों की नहीं - जवाहरलाल नेहरू
  18. कर्म, ज्ञान और भक्ति का संगम ही जीवन का तीर्थ राज है -  दीनानाथ दिनेश
  19. शासन के समर्थक को जनता पसंद नहीं करती और जनता के पक्षपाती को शासन। इन दोनो का प्रिय कार्यकर्ता दुर्लभ है - पंचतंत्र
  20. क्रोध में मनुष्य अपने मन की बात कहने के बजाय दूसरों के ह्रदय को ज्यादा दुखाता है। - प्रेमचंद
  21. मन एक भीरु शत्रु है जो सदैव पीठ के पीछे से वार करता है - प्रेमचंद
  22. मानव जीवन धूल की तरह होता है, हम इसे रो-धोकर  इसे कीचड़ बना देते हैं -बकुल वैद्य
  23. अच्छे शब्दों के प्रयोग से बुरे लोगों का भी दिल जीता जा सकता है - भगवान बुद्ध
  24. इच्छाएं ही सब दुखों का मूल कारण है - भगवान बुद्ध
  25. जिस प्रकार बिना जल के धान नहीं उगता उसी प्रकार बिना विनय के प्राप्त की गई विद्या फलदायी नहीं होती - भगवान महावी
  26. ख्याति नदी की भाँति अपने उद्गम स्थल पर क्षीण ही रहती है किंदु दूर जाकर विस्तृत हो जाती है - भवभूति
  27. सारा हिन्दुस्तान गुलामी में घिरा हुआ नहीं है। जिन्होंने पश्चिमी शिक्षा पाई है और जो उसके पाश में फँस गए हैं, वे ही गुलामी में घिरे हुए हैं - महात्मा गाँधी
  28. सत्य से बड़ा तो इश्वर भी नहीं - महात्मा गाँधी
  29. किसी को माफ़ करना कमजोरी नहीं वरन सामर्थ्यवान ही ऐसा कर सकता है - महात्मा गाँधी
  30. सत्याग्रह बल से नहीं ,हिंशा के त्याग से होता है - महात्मा गाँधी
  31. लोग चाहे मुट्ठी भर हों, लेकिन संकल्पवान हों, अपने लक्ष्य में दृढ आस्था हो, वे इतिहास को भी बदल सकते हैं - महात्मा गाँधी
  32. मुठ्ठी भर संकल्पवान लोग जिनकी अपने लक्ष्य में दृढ़ आस्था है, इतिहास की धारा को बदल सकते हैं - महात्मा गांधी
  33. तपस्या धर्म का पहला और आखिरी कदम है - महात्मा गांधी
  34. विश्वास वह पक्षी है जो प्रभात के पूर्व अंधकार में ही प्रकाश का अनुभव करता है और गाने लगता है - रवींद्रनाथ ठाकुर
  35. सौंदर्य और विलास के आवरण में महत्त्वाकांक्षा उसी प्रकार पोषित होती है जैसे म्यान में तलवार - रामकुमार वर्मा
  36. कुमंत्रणा से राजा का, कुसंगति से साधु का, अत्यधिक दुलार से पुत्र का और अविद्या से ब्राह्मण का नाश होता है -  विदुर
  37. ऐसे देश को छोड़ देना चाहिए जहाँ धन तो है लेकिन सम्मान नहीं - विनोबा भावे
  38. जैसे सूर्य आकाश में छुप कर नहीं विचर सकता उसी प्रकार महापुरुष भी संसार में गुप्त नहीं रह सकते - व्यास
  39. बुद्धि के सिवाय विचार प्रचार का कोई दूसरा शस्त्र नहीं है, क्योंकि ज्ञान ही अन्याय को मिटा सकता है - शंकराचार्य
  40. सारा जगत स्वतंत्रता के लिए लालायित रहता है फिर भी प्रत्येक जीव अपने बंधनो को प्यार करता है - श्री अरविंद
  41. खुद के लिये जीनेवाले की ओर कोई ध्यान नहीं देता पर जब आप दूसरों के लिये जीना सीख लेते हैं तो वे आपके लिये जीते हैं - श्री परमहंस योगानंद
  42. अपनी पीड़ा सह लेना और दूसरे जीवों को पीड़ा न पहुंचाना, यही तपस्या का स्वरूप है - संत तिरुवल्लुवर
  43. बच्चों को पालना, उन्हें अच्छे व्यवहार की शिक्षा देना भी सेवाकार्य है, क्योंकि यह उनका जीवन सुखी बनाता है - स्वामी राम सुखदास
  44. कामनाएँ समुद्र की भाँति अतृप्त हैं। पूर्ति का प्रयास करने पर उनका कोलाहल और बढ़ता है - स्वामी विवेकानंद
  45. उठो जागो और लक्ष्य तक मत रुको - स्वामी विवेकानंद
  46. सबसे उत्तम तीर्थ अपना मन है जो विशेष रूप से शुद्ध किया हुआ हो - स्वामी शंकराचार्य