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अंधाधुंध दौड़ में भूल गए संस्कार Andhadhundh daud me bhul gaye sanskar

Paise ke pichhe lagkar bhul gaye sanskar पैसे के पीछे अंधाधुंध दौड़ में भूल गए संस्कार In the race for the money disappearing rites.

पैसा जीवन के लिए बनाया गया है, लेकिन लोगो ने जीवन पैसे के लिए बना दिया है। आजकल की दुनिया पैसे के पीछे अंधाधुंध दौड़ रही है, इस दौड़ में इंसानियत कदमो तले कुचली जा रही है।

आज माता पिता अपने बच्चों को शिक्षा बड़ी नौकरी पाने के लिए दिलाते हैं। लेकिन उनके संस्कारों के वृद्धि के लिए कोई शिक्षा की व्यवस्था नहीं कर रहे हैं। और संस्कार लुप्त होते जा रहे हैं। राम और रावण कहीं बाहर नहीं, व्यक्ति के अंदर हैं। बच्चे बचपन से ही झूठ और असत्य को अपना लेते हैं, क्योंकि उनके माता-पिता स्वयं सत्य पर विश्वास नहीं करते।


कल्पना कीजिये एक बैंक अकाउंट की जिसमे रोज सुबह आपके लिए कोई 86,400 रुपये जमा कर देता है। लेकिन शर्त ये है की इस अकाउंट का बैलेंस कैरी फॉरवर्ड नहीं होगा, यानि दिन के अंत में बचे पैसे आपके लिए अगले दिन उपलब्ध नहीं रहेंगे। फिर आप क्या करेंगे ? जाहिर है आप एक-एक पैसा निकाल लेंगे। है ना ?

हम सब के पास एक ऐसा ही बैंक है, इस बैंक का नाम है: “समय”, हर सुबह समय हमको 86,400 सेकण्ड्स देता है और हर रात्रि ये उन सारे बचे हुए सेकण्ड्स जिनको आपने किसी बेहतर मकसद के लिए इस्तेमाल नहीं किया है, हमसे छीन लेता है। अब निर्णय आपको करना है की दिए गए 86,400 सेकण्ड्स का आप उपयोग करना चाहते हैं या फिर इन्हें गंवाना चाहते हैं, क्यूंकि एक बार खोने पर ये समय आपको कभी वापस नहीं मिलेगा।

आप हर दिन दिए गए 86,400 सेकण्ड्स का बेहतरीन इस्तेमाल कैसे करना चाहेंगे?? ये आप पर निर्भर करता है। मैं चाहता कि आप अपनी जिंदगी में समय का सबसे ज्यादा उपयोग अच्छे कामों में करें और खुश रहें।

MHB2013

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