पेड़ बचाओ पर्यावरण बचाओ Ped bachao pryavaran bachao

Variksh bachao pryavaran bachao, पेड़ बचाओ पर्यावरण बचाओ, Save Trees Save the Environment.

वृक्षों के बे-रोक-टोक काटे जाने से पृथ्वी पर दुर्लभ जीव जंतु भी समाप्त हो रहे हैं, कुछ तो संख्या में गिनने लायक ही रह गए हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो ये बिल्कुल समाप्त हो जाएंगे।
 

मनुष्य के मन में लालच की सीमा बढ़ने लगी है। अधिकतम लाभ व धन पाने की इच्छा के वशीभूत होकर वह इन वृक्षों को काटकर इमारती लकड़ियों आदि के रूप में प्रयोग करने लगा है।

वृक्षों के काटने से वायु में कार्बन-डाई-आक्साइड की मात्रा  बढ़ जाती है एव आक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे वायु प्रदूषित होकर प्रकृति की स्वाभाविक क्रिया में असंतुलन पैदा कर देती है। फलस्वरुप प्रदूषित वातावरण के कारण पर्यावरणीय असंतुलन से मानव स्वास्थ पर भी घातक असर पड़ रहा है। हमें ये नहीं भुलना चाहिए की आक्सीजन के बिना जीवन असम्भव है।

वैसे तो सभी प्रकार के वृक्ष किसी न किसी प्रकार से मानव जीवन के लिए उपयोगी एवं बहुमूल्य हैं, परन्तु वट वृक्ष, आम वृक्ष, पलाश, पीपल, चन्दन, कदली, नारियल, बेल आदि परंपरा से पूजनीय वृक्षों की श्रेणी में प्रमुख है।

बरगद या वट का छायादार विशाल वृक्ष भारत के हर कोने में होता है, इसकी उम्र भी बहुत लम्बी होती है, इसीलिए लोगों की मान्यता है कि वट वृक्ष अमरत्व का वृक्ष है, और इसमें ब्रह्म देव का निवास है। 

पीपल का वृक्ष भी हमारे देश के निवासियों के लिए पूजनिय है। इसके पत्ते-पत्ते में भगवान का वास माना जाता है। पलाश का वृक्ष सर्व मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है। कदली वृक्ष में भी भगवान विष्णु का वास माना गया है।अतः इसका व्रत व पूजन किया जाता है| चन्दन वृक्ष भी देव-पूजन की पावन सामग्री का अभिन्न अंग है, आम केले और बेल के पत्ते विभिन्न अवसरों पर पूजन के काम आते हैं।

वृक्षों के कटान को रोककर उन्हें अधिकाधिक लगाना चाहिए, तभी पर्यावरण शुद्ध होगा। मानव को स्वास्थ्य सम्बन्धी रोगों से बचाया जा सकेगा।

MHB2013

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