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छींक मारना शुभ या अशुभ - Chhink marna shubh ya ashubh

Sneeze good or bad. छींक मारना शुभ या अशुभ - Chhink marna shubh ya ashubh.

छींक के बारे में अनेक प्रकार के डर और भ्रम व्यक्ति के मन को प्रभावित करते आए है.और आज भी कर रहे है. लोग छींक का अर्थ अपनी सोच के अनुसार निकालते है. वैज्ञानिकों की दृष्टि में छींक का आना एक शारीरिक प्रतिक्रिया है, लेकिन लोगों की दृष्टि में छींक के बारे में विभिन्न धारणाए है.

शास्त्रों में छींक को शुभ और अशुभ दो वर्गो में बांटा गया है. छींक के विषय में अंग-विज्ञान और जानकार लोगों की धारणाए क्या है तथा किन परिस्थितियों की छींक शुभ या अशुभ फल वाली होती है ?


आप कहीं जा रहे हो पीठ के पीछे या बांयी ओर खड़ा व्यक्ति छींक मारता है तो अक्सर इसके परिणाम शुभ ही प्राप्त होते है.

आप कंही यात्रा कर रहे है कोई ऊंचाई पर खड़े होकर छींकता है तो ऐसी छींक यात्रा को शुभ बनाने वाली होती है. यात्रा में सफलता अवश्य ही मिलेगी.

घर से चलते समय व्यक्ति को एक साथ दो छींके हो जाए तो उसे घबराकर अपनी यात्रा को स्थगित नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह छींक शुभ फलदायक होती है.

आसन, शयन, शौच, दान, भोजन, दवा-सेवन, पडाई शुरू करते समय, बीज बोते समय, युद्ध या विवाह के लिए जाते समय छींक आती है तो कुछ लोग इसे अशुभ मानते है. जबकि यह छींक शुभ फलदायक होती है.

यात्रा पर जाते समय अगर आपके सामने से कोई छींक मारता है तो झगड़ा होता है.

चलते समय दांयी ओर से कोई छींकता है तो धन की हानि होती है. इनके छींकने पर यात्रा नहीं करनी चाहिए. कुछ देर रुक कर जाये यदि जरूरी ना हो तो अगले दिन शुरुआत करे.

घर - बाहर के वातावरण के कारण भी छींक आती है. रसोईघर से आती छोंक की धोंस नाक में प्रवेश कर जाति है तो स्वाभाविक रूप से छींक आ जाती है ऐसी छींक का कोई भी शुभ या अशुभ फल नहीं होता है.

गर्म सर्द से भी छींक आती है. सूर्य की ओर सीधे देखने से उसकी तेज रोशनी व पराबैंगनी किरणों का नाक व आंखों में प्रवेश करना भी छींक का कारण बन जाता है. धूल कणों के साफ़-सफाई के समय नाक में प्रवेश करने से भी छींक आती है इन सब छींको का कोई भी अर्थ नहीं होता है.....

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