बच्‍चों में तनाव का कारण - Bachcho me tanaav ka karan.

जून 30, 2014
पहले तनाव उम्रदराज लोगों में देखा जाता था, लेकिन अब छोटे बच्‍चे भी तनाव का शिकार हो रहे हैं। यहां तक कि बच्‍चों में आत्‍महत्‍या की प्रवृति भी तेजी से बढ़ रही है।


इसका सबसे बड़ा कारण है अकेलापन। तन्हाई की काली छाया बच्चो पर भी पड़ रही है। एक वो समय था जब बचपन अपने पुरे उफान पर होता था और पार्क बच्चो से भरे रहते थे। कोई खेल का मैदान खाली नहीं रहता था।

एक आज का युग है जब कोई कम्प्यूटर खाली नहीं होता। बच्चे कम्प्यूटरो से चिपके रहते है। चैटिंग करने के लिए बच्चो के अनगिनत दोस्त है। ये साइलेंट दोस्त है और यही साइलेंट फ्रेंडशिप साइलेंट किलर बनती है। इसी साइलेंट किलर के कारण बच्चे अपने मन की बात किसी से कह नहीं पाते है। माँ – बाप से वे दूर हो गए है और दोस्तों के चिढाने का भय होता है। इससे उनके मन का प्रेसर बाहर नहीं निकलता और प्रेशर कुकर की भांति एक दिन उनका धर्य फट जाता है। नतीजा – मौत।

आत्महत्या वो ही बच्चे करते है जो किसी दबाव के चलते, उचित मार्गदर्शन के अभाव में और सकारात्मक सोच की कमी के चलते मन की बात किसी से कह नहीं पाते और भीतर ही भीतर घुटते रहते है। जरुरी है की अभिभावक और अध्यापक तानाशाही का रवैया छोड़ कर उनके दोस्त बने ताकि कोई बच्चा फासी के फंदे को न चूमे, चाट से छलांग ना लगाए और ना ही विषपान करें।

फूलो को कुम्भलाने से बचाना समाज का दायित्व है। हमारा दायित्व है। शायद तभी हम अपने बच्चो को उज्जवल भविष्य का सूरज बना पाएँगे और तभी वे संसार में रौशनी फ़ैलाने में समर्थ होंगे।

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