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अगर आपके मन में ये तीसरी बात आती है कि मैं मदद क्यों करू तो आपका मदद करना व्यर्थ है।


क्योकि सोच समझ के कि गयी मदद, मदद नहीं होती वो स्वार्थ में बदल जाया करती है।  अतः मदद कर सके तो जरुर करे।  उसमे अपना भला मत सोचिये।

आशा करता हूँ मेरे विचारो ने आपका दिल नहीं दुखाया हो। अगर फिर भी किसी कि भावनाओ को ठेस पहुची हो तो अपने मन से आपसे माफ़ी चाहता हूँ। लेकिन ये एक बार फिर कहूँगा की जहां भी मौका मिले मदद जरुर करें।

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