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मेहनत से मिलती है सफलता - Mehanat se milti hai safalta

प्रिय मित्र यहाँ मैं कुछ ऐसे लोगो के नाम बता रहा हूँ जिन्होंने वास्तव में अपनी मेहनत से सफलता हासिल की और देश में नाम कमाया। ऐसे लोगो से हमें भी कुछ सिख लेनी चाहिए।


मेहनत से मिलती है सफलता:-
  1. धीरू भाई अम्बानी - एक स्कूल अध्यापक के पुत्र धीरू भाई अम्बानी का जन्म गुजरात के चोरवाड़ा गाव में हुआ था। उन्होंने केवल 10वी तक की पढ़ाई की थी और इसके बाद वे अपने बड़े भाई के पास यमन चले गए। धीरू भाई ने वहां पेंट्रोल पम्प पर नौकरी की। आठ वर्ष बाद धीरू भाई मुंबई आ गए। उनके पास मात्र 50 रूपये थे। वर्ष 1958 में उन्होंने एक छोटा सा व्यवसाय शुरू किया, जिसमे वे मसाले, कपडे इत्यादि बेचने का  कार्य करते थे। बाद में उन्होंने छोटी सी एक मिल खरीदी। बस उसके बाद उन्होंने काफी तरक्की की और देखते ही देखते रिलायंस का कारोबार 750 करोड़ तक पहुंच गया।
  2. चालर्स डिकेन्स - चालर्स डिकेन्स का जन्म 1812 में हैम्पशायर में हुआ। उनके पिता नेवी में क्लर्क थे। हालाकि उन्हें ठीक तनख्वाह मिलती थी,  लेकिन पैसो के मामले में उचित समझ ना होने के कारण हमेशा तंगी में रहते थे। चालर्स डिकेन्स उस समय 12 वर्ष के थे। उन्हें लंदन में एक बूट पालिश की फैक्ट्री में नौकरी करनी पड़ी। वर्ष 1824 से 1827  तक उन्होंने वेलिंग्टन हाउस एकेडमी लंदन में पढ़ाई की। फिर एक ला -ऑफिस में क्लर्क का कार्य किया। फिर एक शर्ट हैण्ड रिपोर्टर बने। लिखने के शौकीन डिकन्स का वर्ष 1833 में पहला लेख "अ दिन्नेअर एट पॉप्लर वाक" छपा। इसके बाद उनके जीवन की रुपरेखा ही बदल गयी। धारावाहिक रूप में अखबारों में उपन्यास प्रकाशित करने की परम्परा चालर्स डिकेन्स ने ही शुरू की थी।
  3. सुनीता विलियम्स - अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय तक रहने का रिकॉड बनाने वाली सुनीता विलियम्स का कहना है की मेरी सफलता का राज मेरी विफलता ही है। शायद बहुत कम लोगो को पता होगा की सुनीता विलियम्स पढ़ाई में बहुत होशियार नही थी। वे एक क्लाश में फ़ैल भी हो गई थी। जब आप अपनी असफलताओ से सीखते हो, उनसे ऊपर उठते हो और आगे बढ़ते हो, इससे आप संभवत की एक अच्छे इंसान बन सकते हो।
  4. अब्राहम लिकन - अब्राहम लिकन का जन्म 12 फ़रवरी 1809 को एक गरीब परिवार में हुआ। लिंकन के माता पिता पढ़े नहीं थे। इनके पिता एक किसान थे। उनकी औपचारिक शिक्षा मात्र 18 माह की हुई। वास्तविक रूप से उन्होंने स्वयं ही पढ़ कर शिक्षा प्राप्त की। जहाँ से भी उन्हें किताब उपलब्ध हो सकती थी वे लेकर पढ़ लिया करते थे। अब्राहम लिंकन का जीवन ऐसे संघर्ष की गाथा है जिसने बचपन से ही संघर्ष शुरु किया एवं अपने  आत्म विश्वास, कड़ी मेहनत, ईमानदारी, आपसी सहयोग की भावना के कारण अमेरिका के प्रेजिडेंट पद तक पहुंचे।
  5. लक्ष्मी निवास मितल - एल. एन. मितल का जन्म एक मारवाड़ी परिवार में 15 जून 1950 को राजस्थान के एक गाव में हुआ था। कलकता के सेन्ट जेवियर कालेज से स्नातक परीक्षा पास करने वाले मितल शुरू से ही मेहनती एवं आत्मविश्वाश के धनी थे। पढ़ाई करते समय भी अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बटाते थे। दुनिया में जहाँ भी मिली वहा पर रुग्ण एव बंद स्टील की इकाइयो को खरीद कर उन्हें चालू हालत में लाकर  व्यवसाय में लाभ कमाना ना केवल आत्मविश्वास, आत्मबल, सुजबुझ का प्रतीक है, बल्कि यह उनकी अनोखी दूरदर्शिता का भी घोतक है, जो विरले ही लोगो में पायी जाती है। श्री  मितल की सफलता,  हर उस व्यक्ति के लिए एक  प्रेरणा है जो जीवन में महानता की बुलंदियों  को छूना चाहता है।

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