21/07/2014

पाप का बाप कौन है Paap ka baap kaun hai

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पाप का बाप कौन है 
Paap ka baap kaun hai
Who is the father of sin?

एक बार एक पंडित जी काशी से पढाई करके वापिस अपने घर आए। उनकी शादी भी हो गई। कई दिन बीत जाने के बाद एक दिन उसकी पत्नी ने उससे पूछा – पति देव आप बहुत विद्वान है क्या आप मुझे एक प्रश्न का उत्तर दे सकते हो।


पंडित जी इंकार नहीं कर सके और बोले - पूछो।
उसकी पत्नी बोली – आप मुझे बताइए की “पाप का बाप कौन है?”।

उसकी पत्नी की बात सुनकर पंडित जी सोच में पड़ गए की अब क्या जवाब दूँ। तभी उसकी पत्नी बोली महाराज नहीं मालूम तो रहने दीजिए। पंडित जी ने कहा – नहीं मैं तुम्हे इसका जवाब जरुर दूंगा।


अगले ही दिन पंडित जी काशी के लिए निकल पड़े। रास्ते में ही एक वेश्या रहती थी। वह पंडित जी को देखकर बोली – पंडित जी कहा जा रहे हो। पंडित जी बोले – जी मैं काशी जा रहा हूँ। वेश्या फिर बोली - मैंने सुना है की आप काशी पढ़कर आए हो तो फिर अब वहां क्यों जा रहे हो। पंडित जी ने उन्हें सारी बात बताई। वेश्या बोली पंडित जी इसके बारे में तो मैं भी बता सकती हूँ। पंडित जी बहुत खुश हुए और बोले – अच्छी बात है फिर तो इतनी दूर जाना भी नहीं पड़ेगा।

वेश्या बोली पंडित जी इसके लिए आपको मेरे घर आना पड़ेगा। कल आप मेरे घर आइये, मैं वहीँ आपको बता दूंगी की पाप का बाप कौन है । पंडित जी जैसे ही वेश्या के घर पहुंचे वेश्या ने उन्हें आदरपूर्वक बैठाया और सौ रूपए भेंट के रूप में उनके सामने रख दिये। और कहा – पंडित जी कल अमावस्या है मैं चाहती हूँ की आप मेरे यहाँ भोजन ग्रहण करे। पंडित जी भोजन ग्रहण करने के लिए सहमत हो गए। पंडित जी के लिए रसोई बनाने का सारा सामान वेश्या ने पंडित जी के आने से पहले ही तैयार कर दिया। अब पंडित जी महाराज पधार गए और रसोई बनाने लगे।

तभी वेश्या पंडित जी को भेट के रूप में सौ रूपए देती हुई बोली – देखो, पक्की रसोई तो आप पाते ही हो, कच्ची रसोई हरेक के हाथ की नहीं पाते। पक्की रसोई मैं बना दूँ आप पा लेना। ऐसा कहकर सौ रूपए पंडित जी के पास रख दिए। पंडित जी ने कहा – कोई हर्ज नहीं। और सौ रूपए स्वीकार कर लिए।

अब रसोई बनाकर पंडित जी को परोस दिया। और हाथ जोड़कर सौ रूपए पंडित जी के आगे रखकर बोली – ‘महाराज’ जब मेरे हाथ से बनी रसोई आप पा रहे है तो मैं अपने हाथ से ग्रास दे दूँ। हाथ तो वो ही है जिनसे रसोई बनाई है, ऐसी कृपा करो। पंडित जी मान गए। वेश्या ने जैसे ही ग्रास पंडित जी के मुंह की और किया पंडित जी ने ग्रास लेने के लिए मुंह खोला। वेश्या जोर से बोली - खबरदार जो मेरे घर का अन्न खाया तो। अभी तक भी आपको ज्ञान नहीं हुआ। मैं आप जैसे पंडित का धर्म भ्रष्ट नहीं करना चाहती। यह सब तो मैंने आपको “पाप का बाप कौन है” का ज्ञान करने के लिए किया था। मैं ज्यो – ज्यो आपके आगे रूपए रखती गई त्यों – त्यों आप ढीले होते गए। इससे यह साबित होता है की पाप का बाप लोभ है। इन्सान को लोभ के पीछे नहीं दोड़ना चाहिए क्योंकि लोभ या लालच इन्सान को अँधा बना देता है इससे इन्सान पुण्य और पाप सब भूल जाता है।

पाप का बाप कौन है Paap ka baap kaun hai Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Satish Kumar

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