भैरव जी की आरती - Bhairav ji ki aarti

भैरव जी की आरती, Bhairav ji ki aarti.
प्रिय मित्र, सनातन संस्कृति में पूजा का अपना एक अलग महत्व है, अब आप इन्टरनेट पर भी आरती पढ़ सकते हैं. इस पोस्ट पर आप भैरव जी की आरती पढ़ सकते हो.


जय भैरव देवा, प्रभु जय भैंरव देवा ।
जय काली और गौरा देवी कृत सेवा ।।
तुम्हीं पाप उद्धारक दु:ख सिंधु तारक ।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक ।।
वाहन शवन विराजत कर त्रिशूल धारी ।
महीमा अमित तुम्हारी जय जय भयकारी ।।
तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होंवे ।
चौमुख दीपक दर्शन दु:ख सगरे खोंवे ।।
तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी ।
कृपा करिये भैरव करिये नहीं देरी ।।
पांव घुंघरु बाजत अरु डमरु डमकावत ।।
बटुकनाथ बन बालक जन मन हरषावत ।।
बथुकनाथ की आरती जो कोई नर गावें ।
कहें धरणीधर नर मनवाछिंत फल पावे ।।

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