विन्ध्येश्वरी माता की आरती Vindhyeshvary Mata ji ki aarti

विन्ध्येश्वरी माता जी की आरती.
Vindhyeshvary Mata ji ki aarti.

प्रिय मित्र, सनातन संस्कृति में पूजा का अपना एक अलग महत्व है, अब आप इन्टरनेट पर भी आरती पढ़ सकते हैं. इस पोस्ट पर आप विन्ध्येश्वरी माता जी की आरती पढ़ सकते हो.


सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी तेरा पार न पाया॥ टेक॥
पान सुपारी ध्वजा नारियल ले तरी भेंट चढ़ाया।
सुवा चोली तेरे अंग विराजे केसर तिलक लगाया।
नंगे पग अकबर आया सोने का छत्र चढ़ाया। सुन॥
उँचे उँचे पर्वत भयो दिवालो नीचे शहर बसाया।
कलियुग द्वापर त्रेता मध्ये कलियुग राज सबाया॥
धूप दीप नैवेद्य आरती मोहन भोग लगाया।
ध्यानू भगत मैया तेरे गुण गावैं मनवांछित फल पाया॥

एक टिप्पणी भेजें

© Copyright 2013-2017 - Hindi Blog - ALL RIGHTS RESERVED - POWERED BYBLOGGER.COM