रिश्तोँ की हकीकत कोई क्या समझेगा - Riston ki hakikat koi kya samajhega

रिश्तोँ की हकीकत कोई क्या समझेगा - Riston ki hakikat koi kya samajhega.

पति ने पत्नी को आवाज़ लगा कर कह:- सुनो चार बच्चो की माँ खाना लाओ।
दोबारा फिर आवाज लगाई:- सुनो चार बच्चो की माँ मेरा बैग लाओ।
एक बार फिर बोला:- सुनो चार बच्चो की माँ शाम को खाना टाइम पर बना लेना।
इस पर पत्नी ने जवाब दिया:- अच्छा तीन बच्चो के बापू।

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रिश्तोँ की हकीकत कोई क्या समझेगा।
दिलोँ की जरूरत को कोई क्या समझेगा।
मेरे दोस्त की मुस्कुराहट ही तो मेरी जिंदगी है।
इस मुस्कुराहट की कीमत कोई क्या समझेगा।

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