आर्टिफिशियल स्वीटनर मीठा ज़हर Artificial sweetener mitha jahar

आर्टिफिशियल स्वीटनर जीवन की मिठास को कम करते जा रहे हैं। डायबिटीज से बचने और खूबसूरत दिखने की चाह में लोग चीनी की जगह इनका यूज़ करने लगे हैं, जो स्लिम और ट्रिम तो बनाते नहीं, पर बीमारियां ज़रूर दे देते हैं।

पहले के समय में कोई भी खुशी की बात होने पर हम तुरंत मीठा खाते थे, लेकिन उस मीठे का ट्रेंड बदल गया है। मीठा हम आज भी खाते हैं, लेकिन आर्टिफिशियल। बॉडी को स्लिम करने के चक्कर में हम इतनी आर्टिफिशियल चीज़ों का यूज़ करने लगे हैं कि त्योहारों पर भी आर्टिफिशियल मिठाई उपहार में देते हैं। 
  • आर्टिफिशियल स्वीटनर क्या है: आर्टिफिशियल स्वीटनर या कहें सुगर सब्सिट्यूट एक तरह का केमिकल है। कई शुगर या डायबिटीक पेशेंट्स चीनी की जगह आर्टिफिशियल शुगर इस्तेमाल करते हैं, ताकि वो भी मीठा खा सकें। दरअसल, आर्टिफिशियल स्वीटनर का स्वाद चीनी की तरह ही होता है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि यह किसी मीठे ज़हर से कम नहीं है।  
  • आर्टिफिशियल मीठा मतलब मीठा ज़हर: मार्केट में आप जो स्वीटनर देखते हैं, दरअसल वो उसकी असलियत नहीं है। सच यह है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर न तो आपका मोटापा कम करता है और न ही ही आपको स्लिम- ट्रिम रखता है। नॉर्थ-ईस्टर्न ओहियो यूनिवर्सिटीज कॉलेज ऑफ मेडिसिन के साइकेट्री के प्रोफेसर और चेयरमैन डॉक्टर राल्फ वॉटसन के अध्ययन में यह सामने आया कि आर्टिफिशियल स्वीटनर से सिरदर्द, याददाश्त की कमी, अचानक चक्कर आकर गिर पड़ना, कोमा में जाना और कैंसर जैसी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। इसके अलावा भी यह कई शारीरिक और मनोरोगों का कारण बन सकता है, जिसमें अल्जाइमर, क्रॉनिक थकान, अवसाद आदि प्रमुख हैं। कुछ मामलों में इसके लगातार इस्तेमाल से एडिक्शन की समस्या से भी दो-चार होना पड़ता है। आर्टिफिशियल स्वीटनर वाले ड्रिंक्स और दूसरी चीजें खाने से टेस्ट बड्स में भी चेंज आ जाता है। इससे आपको फिर से खाने की इच्छा होती है और न मिलने पर बेचैनी महसूस होने लगती है। इसे खाने के बाद अच्छा महसूस होता है, क्योंकि ये दिमाग के उन सेंटर्स को एक्टिवेट कर देते हैं, जो खुशी का अहसास कराते हैं।  
  • आर्टिफिशियल स्वीटनर की बढ़ती मांग: डाइटीशियन अपर्णा सिंह कहती हैं- इसकी बढ़ती हुई मांग की सबसे बड़ी वजह लोगों में अब अपनी फिटनेस को लेकर आई जागरूकता और जीरो फिगर की चाह है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, फिगर मेंटेन रखने की चाहत रखने वाले अपनी पसंदीदा चीज़ों को खाने का मोह छोड़ नहीं पाते हैं, लेकिन साथ ही मन में एक उलझन-सी रहती है कि खाएं या नहीं। खाने की इतनी टेंशन हो जाती है कि वो ठीक से सो नहीं पाते। यह परेशानी कई डायबिटिक लोगों को भी होती है, इसलिए लोग आर्टिफिशियल स्वीटनर लेने लगते हैं।  
  • मीठा कम खाने के लिए क्या करें: हमने आपके मीठा खाने की चाह को कम करने और आर्टिफिशियल चीजें न खाने के लिए डॉक्टर से सलाह ली। डॉक्टर के अनुसार, सबसे बेहतर है कि आप संयम रखें और उतना ही मीठा खाएं, जो नुकसान न करे। साथ ही, जमकर एक्सरसाइज़ करें और फल खाया करें। एक्सरसाइज़ करने पर मरीज को भी राहत मिलती है और वजन भी कंट्रोल में रहता है।  
  • ज़्यादा आर्टिफिशियल स्वीटनर खाने पर हड्डियां कमजोर होती हैं: हड्डियों के लिए फ्रुक्टोज जरूरी है जो चीनी से मिलता है, लेकिन आर्टिफिशियल स्वीटनर में यह नहीं होता। आर्टिफिशियल स्वीटनर खाने से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और आर्थराइटिस व ऑस्टियोपोरोसिस जैसी परेशानी शुरू होने लगती है। ज़्यादा स्वीटनर खाने से जोड़ों की साइनिंग लेयर खत्म हो जाती है, जिससे ज्वाइंट्स में रफनेस आने लगती है। हड्डियों में सूजन, खुरदुरापन, वाटर कलेक्शन आदि बीमारियां हो सकती हैं। हड्डी व खून की बनावट में बदलाव आ सकता है, जिससे खून या हड्डियों का लसलसापन कम या ज्यादा हो सकता है।  
  • स्किन के लिए है खतरनाक: आप सुंदर दिखने की चाह में आर्टिफिशियल स्वीटनर खाना शुरू कर देती हैं। सुंदर दिखने का मतलब स्लिम, खूबसूरत, चमकदार और बेदाग स्किन का होना भी है। खूबसूरत दिखने की चाह में आर्टिफिशियल स्वीटनर खाने से स्किन प्रॉब्लम होने लगती है। सबसे बड़ी समस्या एलर्जी की होती है। इसके अलावा पिगमेंटेशन, रैशेज जैसी दिकक्तें भी होने लगती हैं। इससे उम्र ज़्यादा दिखने लगती है। स्किन खुरदुरी हो जाती है और उसकी चमक गायब हो जाती है।