सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस के बारे में Cervical Spondlaitis ke baare me

सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस के बारे में Cervical Spondlaitis ke baare me, About Cervical Spondlaitis.
शरीर का ध्यान नहीं रखने पर रोज़ कोई न कोई परेशानी होती ही है। घुटनों का दर्द, पीठ का दर्द, दिल की परेशानी, ऐसी बुहत सी दिकक्तें हैं, जिनसे अक्सर हम खुद ही झुंझला जाते हैं।
ऑफिस में घंटों डेस्क पर बैठकर काम करना हमारी मजबूरी बन गई है। इस वजह से गर्दन में दर्द होना आम बात हो गई है। लेकिन कभी यह दर्द गर्दन से होते हुए सिर की तरफ बढ़ जाता है और तकलीफ काफी बढ़ जाती है। बढ़ जाने पर यह दर्द असहनीय हो जाता है। गर्दन अकड़ी-सी लगने लगती है और घुमाते भी नहीं बनती। यह परेशानी बढ़ने पर चक्कर आने लगते हैं और उल्टियां तक होने लगती हैं। इसलिए गर्दन के दर्द को हल्के में न लें। यह सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस हो सकता है। यह एक जटिल बीमारी है, जिसके लिए लंबा ट्रीटमेंट लेना पड़ता है। आज हम आपको सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस के बारे में बता रहे हैं, ताकि आप इसके संबंध में जान लें और पूरी सावधानी बरतें।
क्या है सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस: स्‍पॉन्डिलाइटिस दो यूनानी शब्दों से मिलकर बना है। पहला 'स्पॉडिल' का मतलब है रीढ़ की हड्डी और दूसरा शब्द 'आइटिस' है जिसका अर्थ सूजन होता है। इसका मतलब यह है कि रीढ़ की हड्डी में सूजन की शिकायत को सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस कहते हैं। यह रोगी के बैठने, खड़े होने ल लेटने के गलत तरीकों के कारण होता है। गर्दन में दर्द किसी पुरानी चोट या स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण भी हो सकता है। 
सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस की समस्या: यह समस्या महिला और पुरुष, दोनों को हो सकती है। 40 वर्ष की उम्र के बाद लगभग इस तरह की दिक्कत 80 प्रतिशत लोगों को होती है। लेकिन आजकल युवा वर्ग भी इसकी चपेट में आने लगा है। युवा वर्ग में यह समस्या गलत ढंग से बैठने, लेटकर टी.वी देखने या बिस्तर पर टेढ़े लेटने से भी हो जाती है। इसके अलावा, यह बीमारी चोट, इन्फेक्शन या ओस्टियोआर्थराइटिस की वजह से भी हो सकती है। 
लक्षण: स्पॉन्डलाइटिस होने के कई लक्षण हो सकते हैं, जैसे गर्दन में दर्द होना, चक्कर आना, गर्दन में दर्द के साथ बाजू में भी दर्द होना या हाथों का सुन्न हो जाना। गर्दन के आसपास की नसों में सूजन भी हो सकती है। ध्यान रखें: अगर आप कम्प्यूटर पर काम करते वक्त, हर 1 घंटे में उठकर थोड़ा चलें, तो भी आपको आराम मिलेगा। 
सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस होने के कारण: 
  1. बैठने का गलत तरीका: गर्दन का दर्द या स्पॉन्डलाइटिस की समस्या गलत तरीके से बैठने की वजह से भी होती है। सिर झुकाकर काम करने वाले लोगों या कम्प्यूटर पर काम करने वाले लोगों में सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस से ग्रस्त होने की संभावान दूसरे लोगों से अधिक होती है। 
  2. चोट के कारण: खेलते समय या बचपन में कई बार गंभीर चोट लग जाती है। उस समय पता नहीं चलता, पर अगर चोट गर्दन में लगी हो तो यह बीमारी हो सकती है। कई बार रीढ़ की हड्डी में चोट लगने पर सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस हो सकता है। इसके अलावा, गर्दन झुका कर काम करना, लगातार काम करना, भारी बोझ उठाना और अधिक ऊंचे तकिए लगाना, झटका लगना, ऐसे कई बार कारण हैं, जिनसे आपको सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस हो सकता है। 
  3. बढ़ती उम्र के कारण: जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती जाती है, शरीर कमजोर होता जाता है। बढ़ती उम्र में हड्डियां कमजोर सबसे पहले कमजोर होती हैं। दरअसल, हड्डियों में कैल्शियम की कमी होने लगती है। खासकर महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता होने या मासिक धर्म कम होने की वजह यह दिक्कत ज़्यादा होती है। महिलाओं में कैल्शियम की कमी होने से पुरुषों की तुलना में उनकी हड्डियां जल्दी कमजोर होती है। इससे यह दिकक्त बढ़ जाती है। ध्यान रहे कि अगर आप हर रोज़ सुबह और शाम 10-10 मिनट, गर्दन की एक्सरसाइज़ करें, तो भी आपको काफी आराम मिलेगा। 
  4. ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण: ऑस्टियोआर्थराइटिस जोड़ो का विकार है। इसमें हड्डियों को सपोर्ट करने वाले और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने वाले कार्टिलेज और कोमल ऊतकों का किसी कारणवश टूटना शुरू हो जाता है। इस समस्या के कारण भी व्यक्ति स्पॉन्डलाइटिस से ग्रस्त हो सकता है। 
  5. गर्दन में दर्द की शिकायत: गर्दन में दर्द के और भी कारण हैं, जैसे गर्दन की टीबी, बोन ट्यूमर, गर्दन की हड्डियों में होने वाली जन्मजात खराबी आदि। बचपन में इन समस्याओं का पता नहीं चलता। इनका पता बड़ी उम्र में आकर लगता है। 
समस्या का समाधान: गर्दन के दर्द को अनदेखा न करें। गर्दन में दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं और बिना सलाह के एक्सरसाइज़ या इलाज न करें। बॉडी का पॉश्चर ठीक नहीं होने से रीढ़ की हड्डी का अलाइनमेंट बिगड़ने से कमर के निचले हिस्से और गर्दन में तेज दर्द होता है। इसलिए अपने पॉश्चर को ठीक रखें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। 
सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस के लिए योग और आसन: कुर्सी पर या जमीन पर रीढ़ को सीधी करके बैठ जाएं। चेहरे को दाएं कंधे की तरफ सुविधाजनक स्थिति तक ले जाएं। इसके बाद वापस पूर्व स्थिति में आ जाएं। इसके तुरंत बाद चेहरे को बाएं कंधे की ओर ले जाएं। पांच सेकंड तक इस स्थिति में रुककर वापस पूर्व स्थिति में आएं। अब सिर को पीछे की ओर आरामदायक स्थिति तक ले जाएं। थोड़ी देर इस स्थिति में रुकने के बाद पूर्व स्थिति में आएं। सिर को सामने की ओर न झुकने दें। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में गूंथकर हथेलियों को सिर के पीछे मेडुला पर रख कर हथेलियों से सिर को आगे की ओर तथा सिर से हाथों को पीछे की ओर पूरे जोर के साथ इस प्रकार दबाव दीजिए कि हाथ तथा सिर अपनी जगह से हिले-डुले नहीं। इसके बाद हथेलियों को माथे पर रख कर दबाव डालिए। अंत में हथेलियों से ठुड्डी को पूरे जोर के साथ दबाएं। यह पांच-पांच बार दोहराएं। 
आसन जो आप कर सकते हैं: ऐसे लोगों को गर्दन को आगे झुकाने वाले आसनों नहीं करना चाहिए। रोग की गंभीर स्थिति में सबसे पहले फिजियोथेरेपी का सहारा लेना चाहिए। जब थोड़ा आराम मिल जाए तो वज्रासन, सर्पासन, मकरासन, भुजंगासन जैसे आसन कर सकते हैं। अगर आपको ज़्यादा दर्द न हो तो आप मत्स्यासन, सुप्त वज्रासन, सरल धनुरासन आदि भी कर सकते हैं। इनसे काफी लाभ होता है। 
इन बातों का खास ध्यान रखें: 
  • गर्दन पर पट्टा बांधना लाभदायक होता है।
  • कड़े बिस्तर पर सोना चाहिए और अधिक वजन न उठाएं।
  • सिर को आगे की तरफ झुकाकर कम काम करें। 
सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस में आहार: रोगी को तला, मिर्च मसाला, चर्बीयुक्त भोजन नहीं करना चाहिए। ज़्यादा शुगर, मीठा, दही और कोल्ड ड्रिंक भी नहीं लेना चाहिए। सिगरेट, तंबाकू का परहेज करें तो ज़्यादा अच्छा है। इसके अलावा, आप हरी सब्जियां, फल व सलाद को खाने में शामिल करें। इससे आपकी हड्डी को कैल्शियम और विटामिन मिलेंगे। चोकरयुक्त रोटी खाने से भी आपकी लाभ मिलता है। इसलिए इस तरह की बीमारी होने पर सबसे पहले डाइट का ध्यान रखें।
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