जानें पंद्रह घरेलू नुस्खे Jaane 15 garelu nushkhe - Learn fifteen home remedies

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अक्सर घर में काम करते-करते हाथ कट जाता है। ऐसे में, हम जल्दी-जल्दी बैंडेज-पट्टी कराने डॉक्टर के पास भागते हैं। जलने या कटने पर एकदम डॉक्टर के पास भगाने से पहले फर्स्ट एड करना ज़रूरी है। डॉक्टर भी यही कहते हैं कि सबसे पहले फर्स्ट एड ज़रूर करें और तभी डॉक्टर के पास लेकर आएं।


इसके अलावा हेल्थ संबंधी और भी कई छोटी-मोटी परेशानियां होती हैं, जिनका समाधान घर में ही किया जा सकता है, पर जानकारी के अभाव में हम मामूली परेशानी होने पर भी डॉक्टर के पास भागते हैं। यहां आज हम आपको कुछ किचन रेमिडीज के बारे में बता रहे हैं, ताकि कभी जलने-कटने या किसी तरह की दूसरी परेशानी होने पर घर पर ही उपचार कर सकें:  
  1. शहद (हैंगओवर और ब्लड शुगर): हैंगओवर (नशे की अधिकता) होने पर शहद पीना सही रहता है। शहद बॉडी के ब्लड शुगर के लेवल को सही रखता है। हैंगओवर होने पर दो से छ: छोटा चम्मच शहद हर 20 मिनट में लेते रहें। हैंगओवर ज़्यादा होने पर शहद ज़्यादा मात्रा में ले सकते है। शहद लेने पर जब दिमाग हल्का महसूस होने लगे, तो आप खाने से पहले चार चम्मच शहद ले सकते हैं। शहद में पोटेशियम होने की वजह से यह एल्कोहल के दुष्प्रभाव को खत्म करता है। शहद में एक तरह का फ्रुक्टोज होता है जो आपके मेटाबॉलिज्म को सही रखता है।
  2. प्याज (डैन्ड्रफ या जलन): सिर में  डैन्ड्रफ या जलन होने पर प्याज का रस लगाना काफी फायदेमंद होता है। प्याज़ को आधा काटें और जली हुई जगह पर लगाएं। आपको काफी राहत मिलेगी। प्याज़ के रस में सल्फर कपाउंड और क्युर्शेटिन  नामक केमिकल होता है, जो ड्रग और एल्कोहल के असर को कम करता है। भले ही प्याज़ से आपकी आंखें जलती हों, लेकिन यह बेहद ही काम की चीज़ है। 
  3. मटर (सिर दर्द और माइग्रेन): ज़्यादा स्ट्रेस होने और सोचने से सिरदर्द होने लगता है। कुछ लोगों को मौसम बदलने या ज़्यादा शोर से भी सिरदर्द होता है। इसके लिए आप फ्रिज में पॉलिथीन बैग में रखे मटर को अपने सिर पर 10  मिनट के लिए रखें। ठीक 20 मिनट बाद फिर से रखें। यह बैग मटर को फूफंदी से बचाने और दुबारा यूज़ करने के लिए सही रहता है। इसे सिर पर रखने से ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है। 
  4. टी बैग (आंखों की सूजन): फूली और सूजी हुई आंखों का मतलब है कि आप रात भर सोए नहीं हैं। इसका एक कारण पानी कम पीना या बढ़ती उम्र भी हो सकता है। ऐसा होने पर आंखों का पानी टिश्यू में चला जाता है। इससे आंखों पर सूजन आ जाती है। आंखों के सूजने पर बर्फ लगाएं। इसके अलावा, आप चाय बनाने के बाद टी-बैग को फ्रिज में ठंडा होने के लिए रखें और उसके बाद आंखों पर लगाएं। इसे आंखों पर 10 मिनट के लिए रहने दें। इससे सूजन कम होगी और डार्क सर्कल भी कम होने लगेंगे। 
  5. दूध और इलायची (पेट खराब होने पर): पेट खराब होने पर दूध के साथ मोटी इलायची खाने से राहत मिलती है। 
  6. अनार दाना (डायरिया): डायरिया होने पर अनार सबसे अच्छा घरेलू उपचार है। 
  7. ऐलोवेरा जूस (पेट रोग): पेट खराब होने पर ऐलोवेरा का जूस पीने पेट सही स्थिति में आ जाता है। रोज़ 60 ग्राम ऐलोवेरा जूस दिन में तीन बार पिएं। 
  8. ब्राउन शुगर (फूड प्वाइजनिंग): फूड प्वाइजनिंग में राहत के लिए ब्राउन शुगर फायदेमंद रहती है। पेट खराब होने से कमजोरी आने लगती है। ऐसे में, मरीज को चार चम्मच ब्राउन शुगर खिलाने से एनर्जी लेवल बढ़ता है। 
  9. दही (बैक्टीरिया): दही में काफी माइक्रो ऑर्गनिज्म होने की वजह से यह पेट के लिए काफी फायदेमंद होता है। रोज़ खाने में दही लेने से पेट के हानिकारक बैक्टीरिया खत्म होते हैं, जो फूड प्वाइजनिंग होने का कारण होता है। 
  10. नींबू पानी (फैट कम करने के लिए): नींबू में एसिड होने की वजह से यह बैक्टीरिया को खत्म करता है। पेट की दिक्कतों में नींबू पानी सबसे बेहतर घरेलू उपचार है। सुबह रोज़ एक गिलास नींबू पानी पीने से स्वास्थ्य ठीक रहता है। इससे पेट साफ रहता है और बॉडी को प्रचुर मात्रा में विटामिन सी मिलता है। 
  11. पुदीना (एसिड और गैस): पेट की परेशानी या गैस से जुड़ी परेशानी होने पर पुदीना काफी फायदेमंद होता है। पुदीना का पेस्ट बनाकर खाने से पेट की दिक्कतें खत्म होती हैं। पुदीना और दही को साथ मिलाकर खाने से काफी फायदा होता है। 
  12. अदरक (डाइजेस्टिव सिस्टम): सर्दियां आते ही अदरक की चाय पीने का मन करने लगता है। अदरक डाइजेस्टिव सिस्टम से जुड़ी परेशानियों में एक बेहतर घरेलू उपचार है। एक बड़े चम्मच शहद के साथ अदरक का रस मिलाकर पीने से जलन और दर्द में राहत मिलती है। 
  13. तुलसी (इन्फेक्शन): अदरक और दही की तरह तुलसी भी घरेलू उपचार के लिए बेस्ट होम रेमिडीज है। पेट में इन्फेक्शन  और गले में दर्द होने पर तुलसी का रस और एक बड़ा चम्मच शहद मिलाकर पीने से इन्फेक्शन खत्म हो जाता है। तुलसी का असर आपको एक घंटे में ही दिखने लगता है। 
  14. सेब (एसिड और जलन): एसिड और जलन होने पर सेब खाना सही रहता है। सेब में एन्ज़ाइम होने की वजह से यह बैक्टीरिया को कम करता है और डायरिया एवं पेट की दूसरी परेशानियों को भी खत्म करता है। 
  15. केला (एनर्जी लेवल): केले में पोटेशियम की मात्रा ज़्यादा होती है। केला खाने से एनर्जी लेवल बढ़ता है। साथ ही, यह फूड प्वाइजनिंग के असर को भी कम करता है। केला रोज़ खाने से काफी फायदा होता है। यह कई बीमारियो से बचाता है।

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