प्रोटीन विटामिन युक्त गेहूँ के जवारे Protein vitamin yukt gehu ke jaware

प्रोटीन विटामिन युक्त गेहूँ के जवारे Protein vitamin yukt gehu ke jaware, Protein containing vitamins Wheatgrass.

प्रकृति ने हमें अनेक अनमोल नियामतें दी हैं.गेहूँ के जवारे उनमें से ही प्रकृति की एक अनमोल देन है. अनेक आहार शास्त्रियों ने इसे संजीवनी बूटी भी कहा है.  




गेंहूँ के जवारे का रस अमृत के समान, प्रक्रति का अनमोल उपहार, आसानी से उपलब्ध होने वाला, शीघ्रता से असर करने वाला, शारीरिक कमजोरी को दूर करने वाला है.
  1. हिमोग्लोबिन रक्त में पाया जाने वाला एक प्रमुख घटक है.हिमोग्लोबिन में हेमिन नामक तत्व पाया जाता है.रासायनिक रूप से हिमोग्लोबिन व हेमिन में काफी समानता है.हिमोग्लोबिन व हेमिन में कार्बन, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन व नाइट्रोजन के अणुओं की संख्या व उनकी आपस में संरचना भी करीब-करीब एक जैसी होती है.हिमोग्लोबिन व हेमिन की संरचना में केवल एक ही अंतर होता है कि क्लोरोफिल के परमाणु केंद्र में मैग्नेशियम, जबकि हेमिन के परमाणु केंद्र में लोहा स्थित होता है.इस प्रकार हम देखते हैं कि हिमोग्लोबिन व क्लोरोफिल में काफी समानता है और इसीलिए गेहूँ के जवारों को हरा रक्त कहना भी कहा जाता है.
  2. गेहूँ के जवारों में रोग निरोधक व रोग निवारक शक्ति पाई जाती है.कई आहार शास्त्री इसे रक्त बनाने वाला प्राकृतिक परमाणु कहते हैं.गेहूँ के जवारों की प्रकृति क्षारीय होती है, इसीलिए ये पाचन संस्थान व रक्त द्वारा आसानी से अधिशोषित हो जाते हैं.यदि कोई रोगी व्यक्ति वर्तमान में चल रही चिकित्सा के साथ-साथ गेहूँ के जवारों का प्रयोग करता है तो उसे रोग से मुक्ति में मदद मिलती है और वह बरसों पुराने रोग से मुक्ति पा जाता है.यहाँ एक रोग से ही मुक्ति नहीं मिलती है वरन अनेक रोगों से भी मुक्ति मिलती है,
    साथ ही यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति इसका सेवन करता है तो उसकी जीवनशक्ति में अपार वृद्धि होती है.इस प्रकार हम कह सकते हैं कि गेहूँ के जवारे से रोगी तो स्वस्थ होता ही है किंतु सामान्य स्वास्थ्य वाला व्यक्ति भी अपार शक्ति पाता है.इसका नियमित सेवन करने से शरीर में थकान तो आती ही नहीं है.
  3. यदि किसी असाध्य रोग से पीड़ित व्यक्ति को गेहूँ के जवारों का प्रयोग कराना है तो उसकी वर्तमान में चल रही चिकित्सा को बिना बंद किए भी गेहूँ के जवारों का सेवन कराया जा सकता है.इस प्रकार हम देखते हैं कि कोई चिकित्सा पद्धति गेहूँ के जवारों के प्रयोग में आड़े नहीं आती है, क्योंकि गेहूँ के जवारे औषधि ही नहीं वरन श्रेष्ठ आहार भी है.इसे प्रातःकाल स्वल्पाहार के रूप में भी ग्रहण कर सकते हैं.
  4. आंतों में पड़ा हुआ खाना सड़ता है,इस वजह से टॉक्सीन पैदा होते हैं और ये टॉक्सीन रक्त को दूषित करते हैं और इस वजह से मनुष्य कैंसर का शिकार हो जाता है.इसलिए,गेहूं के जवारों के सेवन से पोषण ही प्राप्त नहीं होता,समस्त पाचन अंगों की प्राकृतिक सफाई भी हो जाती है.
जवारे उगाने की विधि -
१. - हमेशा अच्छी किस्म के जैविक गेहूँ के बीज,अच्छी उपजाऊ (उर्वरक) मिटटी और जैविक या गोबर की उम्दा खाद का ही उपयोग करेंरात को सोते समय लगभग 100 ग्राम गेहूँ एक पात्र में भिगो कर रख दें।
२. -अगले दिन गेहुंओं को धो, निथारकर पहले गमले में गेहूँ को परत के रूप में बिछा दें और ऊपर से थोड़ी मिट्टी डाल दें और पानी से सींच दें।
३. - गमले को किसी छायादार स्थान जहां पर्याप्त हवा और प्रकाश आता हो पर धूप सीधी गमलों पर न पड़े।
४. - सात दिन बाद 5-6 पत्तियां के 7-8 इन्च लम्बे जवारे हो जाये तब इन को जड़ सहित उखाड़ कर, अच्छी तरह से धो लें.धोने के पश्चात पुनः कैंची से बारीक-बारीक काट लें.काटने के पश्चात उसे मिक्सर में थोड़ा पानी मिलाकर पीसकर छान लें.अब इसका सेवन कर लें.इसे सुबह-सुबह खाली पेट लें.इसके सेवन के पश्चात १ घंटे तक कोई भी आहार व पेय पदार्थ न लें.प्रारंभ में २५-३० मिली गेहूँ के जवारों का प्रयोग करना चाहिए.बाद में इसकी मात्रा सेवन करने वाले की पाचन क्षमता के अनुसार २००-३०० मिली तक बढ़ाई जा सकती है.जिन्हें पाचन संबंधी तकलीफ है, उन्हें जवारों का रस पीने के स्थान पर उसे चबा-चबाकर खाना चाहिए, ताकि उनके पाचन संबंधी रोग ही दूर नहीं होते हैं वरन्‌ गेहूँ के जवारे आसानी से पच भी जाते हैं.आँतों व आमाशय के अल्सर में पत्तागोभी का रस व गेहूँ के जवारे का रस चमत्कारिक परिणाम देता है.

सावधानियाँ 
गेहूँ के जवारों का रस निकालने के पश्चात अधिक समय तक नहीं रखना चाहिए अन्यथा उसके पोषक तत्व समय बीतने के साथ-साथ नष्ट हो जाते हैं, क्योंकि गेहूँ के जवारों में पोषक तत्व सुरक्षित रहने का समय मात्र ३ घंटे है.गेहूँ के जवारों को जितना ताजा प्रयोग किया जाता है , उतना ही अधिक उसका स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है.इसका सेवन प्रारंभ करते समय कुछ लोगों को दस्त, उल्टी, जी घबराना व अन्य लक्षण प्रकट हो सकते हैं, किंतु उन लक्षणों से घबराने की आवश्यकता नहीं है, आवश्यकता है केवल इसकी मात्रा को कम या कुछ समय के लिए इसका सेवन बंद कर सकते हैं.

 
१. - रस में अदरक अथवा खाने वाला पान मिला सकते हैं इससे उसके स्वाद तथा गुण में वृद्धि हो जाती है.
 २. - इसे गिलोय, लोकी, नीम के पत्तो व तुलसी के पत्तों के रस के साथ भी मिल कर लिया जा सकता है.रस लेने के पूर्व व बाद में एक घण्टे तक कोई अन्य आहार न लें। आधे घंटे में यह रक्त में घुल मिल जाता है.
३.- खटाई ज्वारे के रस में मौजूद एंजाइम्स को निष्क्रिय कर देती है इसे खट्टे रसों (नीबू, संतरा, मौसमी) आदि खट्टे रसो को छोड़कर अन्य फलों और सब्जियों के रस के साथ मिला कर भी ले सकते है।इसमें नमक, चीनी आदि भी नहीं मिलाना चाहिये.

1comments:

नमस्ते , आपका ये लेख सराहनिए हे काफी अच्छी जानकारी दी हे आपने , मेने भी अपने ब्लॉग पर गेहूं के जवारे के बारे में जानकारी दी हे किर्पया मेरी साईट पर भी आयें केंसर में गेहूं के जवारे का प्रयोग

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