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आत्मा है सबसे ताकतवर Aatma hai sab se takatvar, The soul is the most powerful.

इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः परं मनः । मनसस्तु परा बुद्धिर्यो बुद्धेः परतस्तु सः ।।
इंद्रियां शरीर से ज्यादा ताकतवर और सूक्ष्म हैं, मन इंद्रियों से भी ज्यादा सूक्ष्म है, बुद्धि मन से भी सूक्ष्म है, लेकिन बुद्धि से भी ज्यादा सूक्ष्म और श्रेष्ठ आत्मा है।

इंसान जिम आदि से अपने शरीर को मज़बूत बनाकर सोचता है कि वह बहुत ताकतवर हो गया है, जबकि सच यह है कि शरीर हमारा सबसे बाहरी हिस्सा है। इस शरीर से ज्यादा ताकतवर तो इन्द्रियां हैं, जिनके लोभ में ताकतवर से ताकतवर इंसान फंस जाता है। जैसा इन्द्रियां चाहती हैं, शरीर वैसा ही करने लगता है।

अगर गौर से देखा जाए तो इन्द्रियां भी खुद ब खुद कुछ नहीं करतीं। वह तो वैसा ही करती हैं, जैसा मन कहता है। इन्द्रियां मन के वश में होती हैं, यदि मन रोक दे तो सामने रखा स्वादिष्ट खाना भी जीभ नहीं खाती है। इसलिए मन इन्द्रियों से भी ज्यादा ताकतवर है। इसी तरह मन से सूक्ष्म बुद्धि है।

जब बुद्धि किसी अच्छे या बुरे काम का फैसला लेती है तो मन, इन्द्रियां और शरीर, सब उसका ही कहना मानने लगते हैं। लेकिन इस बुद्धि से भी सूक्ष्म और बलवान हमारी आत्मा है, जिसकी ताकत से जीवन चल रहा है।

जब सबसे श्रेष्ठ और ताकतवर आत्मा है, तो उससे जुड़ने की कोशिश होनी चाहिए, जिससे व्यक्ति परम आनंद की स्थिति में रहता है। वैसे भी जो शरीर से ज्यादा काम लेते हैं, उसकी आमदनी और कीमत कम होती है और जो बुद्धि से ज्यादा काम लेते हैं, उनकी आमदनी और कीमत और भी ज्यादा होती है।

केवल इंसानी शरीर से काम लेकर पैसेवाला नहीं बना जा सकता। ऐसे ही जो लोग आत्मा से जुड़े रहते हैं, उनकी कीमत सबसे ज्यादा होती है, मिसाल के तौर पर आध्यात्मिक गुरु।

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