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अम्बे माता जी की आरती Ambe Mata ji ki Aarti

अम्बे माता जी की आरती Ambe Mata ji ki Aarti, Aarti of Ambe Mata.

प्रिय मित्र, सनातन संस्कृति में पूजा का अपना एक अलग महत्व है, अब आप इन्टरनेट पर भी आरती पढ़ सकते हैं. इस पोस्ट पर आप अम्बे माता जी की आरती पढ़ सकते हो.


अम्बे माता जी की आरती:-

सर्वमंगल मांग्लयै , शिवे सर्वार्थसाधिके |
शरण्ये त्र्यम्िके गौरी , नारायणी नमोऽस्तुते ॥
जय अम्बे गौरी , मैया जय श्यामा गौरी | 
तुमको निसदिन ध्यावत , हरि ब्रम्हा शिवरी ॥
जय अम्बे गौरी.....
मांग सिंदुर विराजत , टीको मृगमद को |
उज्जवल से दोऊ नैना , चन्द्रवदन नीको ॥
जय अम्बे गौरी..... 
कनक समान कलेवर , रक्ताम्बर राजे |
रक्त पुष्प गल माला , कण्ठन पर साजे ॥
जय अम्बे गौरी....
केहरि वाहन राजत , खडग खप्पर धारी |
सुर नर मुनि जन सेवत , तिनके दुःख हारी ॥
जय अम्बे गौरी.....
कानन कुंडल शोभित , नासाग्रे मोती |
कोटिक चंद्र दिवाकर , राजत सम ज्योति ॥
जय अम्बे गौरी.....
शुंभ निशंभु बिदारे , महिषासुर धाती |
धूम्र विलोचन नैना , निशदिन मदमाती ॥
जय अम्बे गौरी..... 
चंड मुंड संहारे , शोणित बीज हरे |
मधु कैटभ दोउ मारे , सुर भयहीन करे ॥
जय अम्बे गौरी.....
ब्रम्हाणी रुद्राणी , तुम कमलारानी |
आगम निगम बखानी , तुम शिव पटरानी ॥
जय अम्बे गौरी..... 
चौसंठ योगिनी गावत , नृत्य करत भैरुँ |
बाजत ताल मृदंगा , अरु डमरुँ ॥
जय अम्बे गौरी.....
तुम ही जग की माता , तुम ही हो भरता | 
भक्तन की दुःखहर्ता , सुख सम्पत्ति कर्ता ॥
जय अम्बे गौरी.....
भुजा अष्ट अति शोभित , वर मुद्रा धारी |
मनवांच्छित फल पावे सेवत नर नारी ॥
जय अम्बे गौरी..... 
कंचन थाल विराजत अगर कपुर बात्ती | 
श्री माल केतु में राजत कोटि रतन ज्योती ॥
जय अम्बे गौरी.....
या अम्बे जी की आरती जो कोई नर गाये |
कहत शिवानंद स्वामी , सुख संपत्ति पाये ॥
जय अम्बे गौरी.....
जय अम्बे गौरी , मैया जय श्यामा गौरी |
तुमको निसदिन ध्यावत , हरि ब्रम्हा शिवरी ॥