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कर्म को समझना मुश्किल है Karam ko samjhana mushkil hai

कर्म को समझना मुश्किल है Karam ko samjhana mushkil hai, Task is hard to understand.

कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं विकर्मणः। अकर्मणश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः।।
अर्थात: कर्म का ज्ञान होना चाहिए, विकर्म का ज्ञान होना चाहिए और अकर्म का भी ज्ञान होना चाहिए, क्योंकि कर्म को समझ पाना बहुत मुश्किल है।

जिसके मन को राग और द्वेष हिलाते रहते हों, समय-समय अहंकार बाहर आ जाता हो..जिसको काम, क्रोध, लोभ, मोह और भय परेशान करता हो, ऐसे इंसान द्वारा किया गया काम कर्म कहलाता है। इसमें पाप और पुण्य मिलाजुला होता है, लेकिन जब इंसान इनसे ऊपर उठकर मन और इंद्रियों को अपने वश में कर लेता है, तब वह योगी हो जाता है। 

अब उसके द्वारा किया गया हर कर्म निष्काम होता है, फलरहित होता है और इसे अकर्म कहते हैं। जो कर्म समाज की व्यवस्था को गड़बड़ा दे, दूसरों को पीड़ा पहुंचाए या खुद को नीचे की ओर ले जाए, वो विकर्म या उल्टे कर्म कहलाते हैं। ऐसे कर्म पाप फल देते हैं। इंसान विकर्म तब करता है, जब उसके मन के घने अंधकार की वजह से अंदर का विकार प्रचंड रूप ले लेता है। 

असलियत में इन कर्मों को समझना बड़ा मुश्किल है, क्योंकि कब कौन सा कर्म व्यक्ति कर ले या कौन सा कर्म अपना फल देने लगे, पता ही नहीं चलता। कर्म की गति को कोई भी नहीं जान पाया है, इसलिए भगवान कह रहे हैं कि कर्म की गति को समझ पाना बहत मुश्किल है।

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