मौका देखकर उभरता है काम Mauka dekhakar ubharta hai kaam

मौका देखकर उभरता है काम Mauka dekhakar ubharta hai kaam, Excitement at the opportunity arises.

एवं बुद्धेः परं बुद्ध्वा संस्तभ्यात्मानमात्मना। जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दुरासदम् ।।
भगवान कहते हैं कि बुद्धि से भी सूक्ष्म आत्मा को जानकर और बुद्धि से ही मन को काबू में करके तुम अपने सबसे बड़े शत्रु को मार डालो।

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि जीवन में ज्ञान को बढ़ा कर अपनी बुद्धि को सूक्ष्म करते जाओ, इससे विवेक ज्ञान का जन्म होगा। जिस तरह से बुद्धि संसार में अच्छे-बुरे का ज्ञान देती है, वैसे ही विवेक का ज्ञान सबसे बड़े सत्य का रास्ता दिखाता है। यही विवेक आत्मा का अनुभव कराता है। इसी से हम बुद्धि और मन को वश में करते हैं। जब मन वश में होता है, तब इन्द्रियां खुद ब खुद काबू में आ जाती हैं। यह बुराई को खत्म करने की एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है।

अधिकतर लोग इस साधना से न जाकर सीधे अपनी कामवासना को दबाकर बाहर से साधु बन जाते हैं, लेकिन असल में वासना अंदर ही रह जाती है। ऐसे में मौका पाकर कामवासना उभरती है। कभी-कभी इंसान बाहर से वासना को दिखावटी और बनावटी तरीके से काबू में तो कर लेता है, लेकिन यह कोई समाधान नहीं है।

भगवान कह रहे हैं कि जब तक सूक्ष्म बुद्धि और आत्मा को नहीं जानोगे, तब तक काम भीतर मन में पड़ा ही रहेगा। ऐसे में आत्मा को जानकर पूरी सजगता से मन में पड़े हुए अपने कामरूपी दुश्मन को ज्ञान की आग से भस्म कर डालो। यदि ऐसा नहीं किया तो सत्य के ज्ञान के अभाव में काम फिर से उभर आएगा।

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