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प्रभु के भाव में लीन हो Prabhu ke bhav me leen ho, Be absorbed in the sense of the Lord.

एक लड़के ने मुझसे प्रश्न किया, 'रावण तो घोर पापी था। फिर भी, रामायण में कहा गया है कि उसे मोक्ष मिला। तो रावण को कैसे मोक्ष मिला?' प्रश्न बहुत अच्छा है।

रामायण में ही एक शिक्षाप्रद कहानी भी है जिसमें इस प्रश्न का उत्तर निहित है। वह क्या है ?

जब राम-रावण की लड़ाई चल रही थी और उसमें रावण की हार हो रही थी, उस समय रावण शिवजी से प्रार्थना कर रहा था - बचाओ बचाओ मैं मर रहा हूं। मगर उसको बचाने के लिए शिव ने कुछ नहीं किया। पार्वती ने कहा, 'रावण तुम्हारा भक्त है, अब रावण मर रहा है, तुम नहीं बचाओगे?' शिवजी ने कहा,'नहीं, रावण महापापी है। मृत्यु ही उसकी सजा है। लेकिन मरने के बाद जाएगा कहां? शिवजी के साथ ही तो रह जाएगा। परमात्मा के बाहर तो कहीं जा नहीं सकता। मगर, लौकिक जगत में उसकी सजा है मृत्यु।'

पार्वती ने कहा, 'नहीं, नहीं, वह महापापी नहीं है। वह है अतिपापी।' परनारी का जो अपहरण किया वह होता था उन दिनों अतिपापी, क्योंकि उस समय के भारत का सामाजिक नियम था, जिसके अनुसार अगर किसी नारी को पकड़कर कोई ले गया, उसका अपहरण किया तो दोबारा उस नारी को समाज में नहीं लिया जाता था। यह सामाजिक व्यवस्था बहुत खराब थी। किंतु, उसी अपहरण के अपराध के कारण स्थायी प्रकृति की क्षति हो गई। तो रावण हुआ अतिपापी। प्रायश्चित का कोई उपाय नहीं है इसलिए वह अतिपापी है।


इसीलिए पार्वती का प्रश्न था रावण महापापी क्यों ? शिवजी का उत्तर था, 'रावण ने जो चोरी की, अपहरण किया, वह अगर चोर के रूप में करता तो वह अतिपापी होता। लेकिन वह आया था साधु के रूप में और उसने कुलनारी का अपहरण किया तो भविष्य में कोई कुलनारी साधु का विश्वास नहीं करेगी। कोई साधु अगर आकर कहे 'भिक्षां देहि' तो कोई भी कुलनारी ऐसा सोच सकती है कि हो सकता है यह साधु नहीं हो, यह भी रावण जैसा ही हो।

रावण ने ऐसा कुकर्म किया जिसका असर भविष्य में भी साधुओं के ऊपर पड़ता रहेगा। तो रावण के कर्म का प्रभाव रेकरिंग नेचर का हो गया। इसलिए रावण महापापी है।' उत्तर बहुत सुंदर है। लेकिन, फिर भी पार्वती ने कहा, 'नहीं, नहीं, मैं बचा लूंगी उसे।' शिवजी ने कहा- तुम कोशिश कर सकती हो मगर बचा नहीं सकोगी। तो आखिर जो होने को था, वह हुआ।
आज सुबह जो एक लड़के ने प्रश्न किया कि रावण महापापी था, तो उसको मोक्ष कैसे मिला? अब देखो, रावण का ध्येय क्या था ? उसके ध्यान का विषय क्या था ? वह किस के संबंध में हमेशा सोचता था ? वह राम के बारे में चौबीसो घंटे सोचता रहता था।

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