क्या आप जानते हो एक औषधीय पौधा है सदाबहार - Kya aap jante ho ek aushdhiy paudha hai sadabahaar

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Do you know evergreen is a medicinal plant. क्या आप जानते हो एक औषधीय पौधा है सदाबहार - Kya aap jante ho ek aushdhiy paudha hai sadabahaar.

घर के आंगन, क्यारियों और उद्यानों में उगाए जाने वाला 'सदाबहार' एक औषधीय पौधा है, जिसका वानस्पतिक नाम कैथेरेन्थस रोसियस है। इस वनस्पति में विन्कामाईन, विनब्लास्टिन, विन्क्रिस्टीन, बीटा-सीटोस्टेराल जैसे महत्वपूर्ण रसायन पाए जाते हैं।

दुनियाभर के हर्बल जानकार इसके औषधीय गुणों का बखान करते नहीं थकते और हिंदुस्तान के आदिवासी अंचलों में भी इसे महत्वपूर्ण हर्बल नुस्खे के तौर पर अपनाया जाता है।
चलिए, आज MHB2013 के इस पोस्ट से जानते हैं सदाबहार के औषधीय गुणों के बारे में:
  1. पत्तियों और फूलों को कुचलकर बवासीर होने पर इसे लगाने से तेजी से आराम मिलता है। आदिवासी जानकारों के अनुसार, ऐसा प्रतिदिन रात को सोने से पहले किया जाना ठीक होता है।
  2. इसकी पत्तियों के रस को ततैया या मधुमक्खी के डंक मारने पर लगाने से बहुत जल्दी आराम मिलता है। इसी रस को घाव पर लगाने से घाव भी जल्दी सूखने लगते हैं। त्वचा पर खुजली, लाल निशान या किसी तरह की एलर्जी होने पर पत्तियों के रस को लगाने पर आराम मिलता है। 
  3. त्वचा पर घाव या फोड़े-फुंसी हो जाने पर आदिवासी इसकी पत्तियों का रस दूध में मिला कर लगाते हैं। इनका मानना है कि ऐसा करने से घाव पक जाता है और जल्द ही मवाद बाहर निकल आता है।
  4. सदाबहार के फूलों और पत्तियों के रस को मुहांसों पर लगाने से कुछ ही दिनों में इनसे निजात मिल जाती है। पत्तियों और फूलों को पानी की थोड़ी सी मात्रा में कुचल कर लेप को मुहांसों पर दिन में कम से कम दो बार लगाने से जल्दी आराम मिलता है।
  5. डांग-गुजरात के आदिवासी लाल और गुलाबी फूलों का उपयोग डायबिटीज़ में लाभकारी मानते हैं। आधुनिक विज्ञान भी इन फूलों के सेवन के बाद रक्त में ग्लुकोज़ की मात्रा में कमी को प्रमाणित कर चुका है। दो फूल को एक कप उबले पानी या बिना शक्कर की उबली चाय में डालकर ढंककर रख दें और फिर इसे ठंडा होने पर रोगी को पिलाएं। ऐसा माना जाता है कि इसका लगातार सेवन मधुमेह में फायदा पहुंचाता है।
  6. अब वैज्ञानिक सदाबहार के फूलों का उपयोग कर कैंसर जैसे भयावह रोगों के लिए भी औषधियां बनाने पर शोध कर रहे हैं। डांग जिले में भी आदिवासी इस पौधे के विभिन्न हिस्सों को ल्युकेमिया जैसे रोगों के निदान के लिए उपयोग में लाते हैं। आधुनिक शोधों के अनुसार, इस पौधे की पत्तियों में पाए जाने वाले प्रमुख अल्कलायड रसायनों जैसे विनब्लास्टिन और विनक्रिस्टिन को ल्युकेमिया के उपचार के लिए उपयोगी माना गया है।
  7. इसकी पत्तियों को तोड़े जाने पर जो दूध निकलता है, उसे घाव पर लगाने से किसी तरह का संक्रमण नहीं होता और घाव जल्दी सूख भी जाता है।  
  8. पत्तियों को तोड़ने पर निकलने वाले दूध को खाज-खुजली में लगाने पर जल्द आराम मिलने लगता है। दूध को पौधे से एकत्र कर प्रभावित अंग पर दिन में कम से कम दो बार लेप किया जाना चाहिए। 

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