खेलों का राजा और मेरा प्रिय खेल - Khelon ka Raja aur Mera priya khel

बचपन से ही मैं खेल कूद का शोकिन रहा हूँ! क्रिकेट, कबड्डी आदि सभी खेलों में मुझे दिलचस्पी है, किन्तु मुझे क्रिकेट अधिक प्रिय है! आज सारा विश्व क्रिकेट को ‘खेलों का राजा’ मानता है! क्रिकेट ने लोगो के दिलों को जीत लिया है! क्रिकेट मैच का नाम सुनते ही लोग उसे देखने के लिए अधीर हो उठते है! जो लोग मैच देखने नहीं जा सकते, वे टी.वी. पर उसे देखना या रेडियो पर उसकी कमेंटरी सुनना नहीं चूकते! अखबारों के पन्ने क्रिकेट के समाचारो से भरे होते है! सचमुच क्रिकेट एक अनोखा खेल है!


क्रिकेट का शौख मुझे अपने बड़े भाईसाहब से मिला है! उन्होंने हमारे मोहल्ले के कुछ मित्रों की एक टीम बनायीं थी! यह टीम छुट्टियों के दिन मैदान में क्रिकेट खेलने जाती थी! मैं भी उन सबके साथ खेलने लगा! एक दिन मेरे बल्ले ने दनादन तीन चौके फटकार दिए! सबने मुझे शाबाशी दी! बस, उसी दिन से क्रिकेट मेरा प्रिय खेल बन गया! धीरे-धीरे भाईसाहब ने मुझे इस खेल के सभी धांव-पेच सिखा दिए !

मैं हररोज शाम को अपने मित्रों के साथ क्रिकेट खेलता हूँ! क्रिकेट के विविध मैच मैं अवश्य देखता हूँ! मैं अपने फुरसत के समय क्रिकेट-संबंधी पत्रिकाएँ पढता हूँ! अख़बार में प्रकाशित क्रिकेट-संबंधी लेखों एवं चित्रों का मैंने अच्छा-खासा संग्रह तैयार किया है! क्रिकेट के सभी प्रसिद्ध खिलाडियों के चित्र मेरे अलबम में है! सचमुच क्रिकेट का नाम सुनते ही में ख़ुशी से उछल पड़ता हूँ!

पिछले साल मैं अपने स्कूल में क्रिकेट टीम का कप्तान था! सालभर में जितने मैच खेले गए थे, उन सबमे हमारे दल की जीत हुई थी! आज मैं अपने विद्यालय के विद्यार्थीयों का प्रिय खिलाडी हूँ! अध्यापक मुझ पे गर्व करते है! सब लोग मुझे अपने स्कूल का जूनियर ‘सचिन’ मानते है!

क्रिकेट के खेल से अच्छा व्यायाम हो जाता है! इससे शरीर फुर्तीला बना रहता है! अनुशासन, कर्तव्य - परायणता और सहयोग की शिक्षा भी क्रिकेट से मिलती है! क्रिकेट का खिलाडी न तो विजय मिलने पर गर्व करता है और न हारने पर निराश होता है! इसके अतिरिक्त इस खेल के द्वारा नाम और दाम दोनों पाने की भरपुर गुंजाईश रहती है!

आज मुझमे जो शारीरिक शक्ति और मानसिक क्षमता है, उसमे क्रिकेट का काफी योगदान है! मैं इस खेल का बहुत ऋणी हूँ! क्रिकेट को अपना सर्वाधिक प्रिय खेल बनाकर मैं इस ऋण को उतारना चाहता हूँ! हो सकता है, यह खेल मेरे भावी जीवन में चार-चाँद लगा दे!

एक टिप्पणी भेजें