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हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर प्रणाम करें - Hath jodkar aur sir jukakar pranaam karen

प्रिय दोस्त हम भारत के रहने वाले है हमें अपनी भारतीय संस्कृति के अनुसार ही व्यवहार करना चाहिए. हमें अन्य देशों में किए जाने वाले व्यवहार, रहन सहन और पहनावे को नहीं अपनाना चाहिए.


आज हम इस पोस्ट में अपनी दिनचर्या में हुए एक ऐसे बदलाव पर बातचीत करेंगें जो हमारी संस्कृति का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा होते हुए भी हम इसे छोड़कर विदेशी व्यवहार को अपनाते जा रहें है. वो है नमस्कार करना. आजकल हम जब भी किसी से मिलते है तो अपने आप हमारा हाथ दुसरे की तरफ हाथ मिलाने के लिए बढ़ जाता है लेकिन यदि हम अपनी संस्कृति की बात करें तो हमें हाथ मिलाकर नहीं बल्कि दोनों हाथ जोड़कर दुसरे व्यक्ति का अभिवादन करना चाहिए. ऐसा करने के कुछ फायदे भी है और ऐसा करने से हमारी संस्कृति भी बनी रहेगी. Read More Posts


इस प्रक्रिया में दोनों हाथ एक दुसरे से जुड़ते है. शरीर में दाईं ओर झड़ा और बांईं ओर पिंगला नाड़ी होती है तथा मस्तिष्क पर त्रिकुटि के स्थान पर शुष्मना का होना पाया जाता है. अत: नमस्कार करते समय झड़ा, पिंगला के पास पहुंचती है तथा सिर श्रृद्धा से झुका हुआ होता है. Read More Posts
  • इससे शरीर में आध्यात्मिकता का विकास होता है.
  • इससे हमारा शरीर दुसरे के शरीर से स्पर्श भी नहीं करता और अभिवादन भी हो जाता है.
  • हाथ मिलाने से दो शरीरों की ऊर्जा आपस में टकराती है जिसका विपरीत प्रभाव न सिर्फ शरीर बल्कि मस्तिष्क पर भी पड़ता है.
  • हम सभी जानते है की भारतीय समाज में पुरुषों का औरतों से हाथ मिलाकर अभिवादन करना मना है इससे भी हम विद्युतीय तरंगता के प्रभाव से बच पाते है. 
 इसलिए दोस्तों हाथ मिलाना छोड़कर हाथ जोड़कर नमस्कार करना ज्यादा बेहतर है. Read More Posts
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