एक गाभरू छोरा अपनी ससुराड़ गया - Haryanvi chutkule

प्रिय दोस्त यदि आप हरयाणवी जोक्स पढ़ने के इच्छुक है तो आप इस पोस्ट पर अपनी इस इच्छा को पूरा कर सकते हो. क्योंकि हम आपके लिए हरयाणवी जोक्स और एस एम एस लेकर हाजिर हुए है. आप इस वेबसाइट पर दिए गए सभी जोक्स और एस एम एस बिना किसी शुल्क के पढ़ सकते हो....

मेरी खाट के रेल की पटड़ी पै घाल राक्खी सै ?

एक गाभरू छोरा अपनी ससुराड़ गया । सुसराड़ के ठाठ देख कै उसनै सोच्या अक दो-चार दिन और ठहर ल्यूं ।


कई दिन पाच्छै उसके सुसरे नै पड़ौस की कई छोरी बुलाई अर बोल्या - ए छोरियो, इस मलंग नै डिगाओ हाड़े तैं, यो तै कत्ती-ए चिप-ग्या । आगलै दिन दोफाहरी में मलंग रोट खा कै ठाठ तैं सोवै था । उसकी साळी कहण लागी - जीजा, खड़ा हो ले, रेल का टाइम हो रहया सै ।


उसकी माड़ी-माड़ी आंख खुल्ली अर बोल्या - क्यूं रौळा कर रही सो, सोवण दो नै । वे फिर बोल्ली - जीजा, खाट छोड-कै उठ, रेल का टाइम हो रहया सै ।


मलंग नै जवाब दिया - "रेल चली जागी तै जाण दो - मेरी खाट के रेल की पटड़ी पै घाल राक्खी सै ?"