अब आप ही सोचिये किसान बेचारा क्या करें Ab aap hi sochiye kisaan bechara kya karen

आज का यह पोस्ट किसान भाइयों के लिए है. किसान भाइयो को अपनी फसल की बिजाई करने से लेकर फसल पक कर कटने तक बहुत सारी आपत्तियों का सामना करना पड़ता है. यदि बारिस समय पर ना हो तो मुश्किल, बारिश ज्यादा हो जाएँ तो फसल ख़राब हो जाने का भय रहता है.


तरह - तरह की बीमारियों से नुकसान, बिमारियों से फसल की रक्षा करने के लिए महँगी दवाइयों पर पैसे का खर्चा, फसल में पैदा होने वाले खरपतवार को निकलवाने पर खर्चा, ओला वृष्टि या पकी फसल पर आग से होने वाले नुकसान की मार, आवारा पशुओं के खेत में घुस जाने से भी फसल को बचाना, फसल की बिजाई का खर्चा, पक जाने पर फसल की कटाई का खर्चा, किसानो के सभी उपकरण मोटर, इंजन, पानी निकालने वाले पंखें और अन्य भी बहुत सारे सामान खेतों में खुलें में पड़ें रहते है जिनके चोरी होने का डर रहता है. Read More Posts

कडकती धुप और बर्फ जमाने वाली सर्दी में भी खेतों में पानी देना या अन्य काम करना होता है. किसान ही नहीं बल्कि उसके परिवार का प्रत्येक सदस्य पूरा दिन खेतों में मिट्टी के साथ मिटटी होता रहता है. इस सब के बाद जब किसान अपनी फसल को बाजार में बेचने के लिए लेकर जाता है तो रही सही कसर फसल के कम भाव और लागत ज्यादा द्वारा मिट जाती है. Read More Posts

फसल पर जो खर्चा होता है उसे पूरा करके बचत केवल तभी हो सकती है जब हर बार फसल की पैदावार अच्छी हो. परन्तु ऐसा नहीं होता है. यदि एक बार फसल की पैदावार अच्छी हो भी जाती है तो अगले ही साल प्राकृतिक आपदाओं के कारण हिसाब बराबर हो ही जाता है. अब आप ही सोचिये किसान बेचारा क्या करें. Read More Posts
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