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इसे ध्यान से पढे आँख में आंसू आ जायेंगे Ise dhyan se padhen aankh me aansu aa jayenge

मुझे मोटरसाईकिल का शौक चढ़ आया था क्योकि मेरे दोस्त के पास भी मोटरसाईकिल थी वो दिन भर मोटरसाईकिल पर ऐश करता था. एक दिन मैं पापा के पास बैठा था. मुझे लगा आज पापा से मोटरसाईकिल की मांग कर ही लूँ इसलिए मैंने पापा से मोटरसाईकिल दिलाने के लिए कह दिया. 

पापा ने मुझे बड़े प्रेम से कहा - बेटा अभी नहीं, वैसे भी हमारे पास स्कूटर है जब भी हमें कोई काम होता है तो हम स्कूटर से जा सकते है. लेकिन मैं जिद पर अड़ गया इसलिए पापा ने मुझसे कहा कि वो मुझे बाइक लाकर दे देंगे. मैं बहुत खुश हुआ.

तीन दिन बीत गए लेकिन बाइक नहीं आई. पापा सुबह ड्यूटी पर जाने के लिए तैयारी कर रहें थे. मैंने पापा से फिर दोबारा बाइक के लिए कह दिया. पापा ने कहा - "बेटा इन्तजार करो बाइक आ जाएगी." यह कहकर वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए. गुस्से में आकर मैं घर से चला आया. इतना गुस्सा था की गलती से पापा के ही जूते पहन के निकल गया. मैंने सोचा - मैं आज बस घर छोड़ दूंगा, और तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा. पापा जब मोटर साइकिल नहीं दिलवा सकते थे, तो क्यूँ इंजीनियर बनाने के सपने देखतें है.

आज मैं पापा का पर्स भी उठा लाया था जिसे किसी को हाथ तक न लगाने देते थे. मुझे पता है इस पर्स में जरुर पैसो के हिसाब की डायरी होगी. पता तो चले कितना माल छुपाया है माँ से भी. हाथ नहीं लगाने देते किसी को. 

घर से बाहर निकला तो दूध वाला माँ से कह रहा था- "बहन जी पिछले महीने का पैसा भी अब तक नहीं दिया, ऐसा ही चलता रहा तो मुझे दूध बंद करना पड़ेगा". मैं उन्हें अनदेखा करके निकल गया.  Read More Posts

जैसे ही मैं कच्चे रास्ते से सड़क पर आया, मुझे लगा जूतों में कुछ चुभ रहा है. मैंने जूता निकाल कर देखा. मेरी एड़ी से थोडा सा खून रिस आया था. जूते की कोई कील निकली हुई थी, दर्द तो हुआ पर गुस्सा बहुत था और मुझे घर छोड़कर जाना ही था. 

जैसे ही कुछ दूर चला मुझे पांवो में गिला गिला लगा, सड़क पर पानी बिखरा पड़ा था. पाँव उठा के देखा तो जूते का तला टुटा था. मैं पागल तो नहीं था झट से समझ गया एक नंबर के कंजूस है पापा कोई उनकी दौलत पर शक ना करें इसलिए टूटे हुए जुते पहनते है. जैसे - तैसे लंगड़ाकर बस स्टॉप पहुंचा, पता चला एक घंटे तक कोई बस नहीं है.

मैंने सोचा क्यों न पर्स की तलाशी ली जाए. मैंने पर्स खोला, एक पर्ची दिखाई दी, लिखा था - एडमिशन के 35000 हजार और लैपटॉप के लिए 40 हजार उधार लिए है, पर एडमिशन तो मेरा हुआ था और लैपटॉप भी घर में मेरे पास है?  Read More Posts

दूसरा एक मुड़ा हुआ पन्ना देखा, उसमे उनके ऑफिस की किसी हॉबी डे का लिखा था उन्होंने हॉबी लिखी अच्छे जूते पहनना. ओह.. अच्छे जुते पहनना ??? पर उनके जुते तो टूटे हुए है. माँ पिछले चार महीने से हर पहली को कहती है नए जुते ले लो और वे हर बार कहते "अभी तो 6 महीने जूते और चलेंगे. मैं अब समझा कितने चलेंगे.

तीसरी पर्ची में लिखा था - पुराना स्कूटर दीजिये एक्सचेंज में नयी मोटर साइकिल ले जाइए. पढ़ते ही दिमाग घूम गया. पापा का स्कूटर... ओह्ह्ह्ह.... मैं घर की तरफ भागा...

अब पांवो में वो कील चुभ रही थी या नहीं मुझे नहीं पता. मैं घर पहुंचा. न पापा थे न स्कूटर. ओह्ह्ह... नही... मैं समझ गया कहाँ गए होंगे... मैं दौड़ा और एजेंसी पर पहुंचा. पापा वहीँ थे. मैंने उनको गले से लगा लिया और आंसुओ से उनका कन्धा भिगो दिया. नहीं पापा नहीं... मुझे नहीं चाहिए मोटर साइकिल बस आप नए जुते ले लो और मुझे अब बड़ा आदमी बनना है वो भी आपके तरीके से.

आज मैं समझा - माँ एक ऐसी बैंक है जहाँ आप हर भावना और दुख जमा कर सकते है. और पापा एक ऐसा क्रेडिट कार्ड है जिनके पास बैलेंस न होते हुए भी हमारे सपने पूरे करने की कोशिश करते है. 

अपने माता - पिता से हमेशा प्यार करें. उनकी भावनाओं को समझे और उनकी कदर करें.  Read More Posts