देश के विकास में आरक्षण सबसे बड़ी बाधा है Desh ke vikas me aarakshan sabse badi badha hai

आज भारत देश में आरक्षण को लेकर काफी चर्चाएँ हो रही है. जिन जातियों के लोग आरक्षण से वंचित है वो भी अब आरक्षण लेना चाहते है. परन्तु क्या आरक्षण ही सब समस्याओं का समाधान है? क्या आरक्षण मिलने पर हमारे देश का विकास संभव है? इस बारे में विचार करना होगा.


आज इस पोस्ट में हम आरक्षण से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी लेंगें यहाँ हम आरक्षण के फायदे पर कोई चर्चा नहीं करेंगें क्योंकि जैसे कि कहा जाता है की "जो सोना कानों को काटें उसका क्या फायदा". आरक्षण भी ऐसा ही एक सिस्टम है जिसने देश के विकास को रोक रखा है.

आरक्षण की आड़ में कम अंक प्राप्त करने वाले जाहिल लोग नौकरी करते है और प्रतिभायें सडको पर घूमती रह जाती है। सभी को शिक्षा के समान अवसर दिए जाएँ. जो गरीब है उनके बच्चों को मुफ्त वर्दी, कापी-किताबें और फ्री शिक्षा प्रदान की जाएँ. गरीब किसी भी जाति का हो सकता है इसलिए यह अवसर जाति के आधार पर न होकर गरीबी के आधार पर होना चाहिये.

यह सब केवल शिक्षा तक ही सिमित होना चाहिए. नौकरी के मामले में सब जातियों के लोग बराबर होने चाहिए और उनका चुनाव भी ईमानदारी पूर्वक होना चाहिए. भगवान कभी किसी जाति के लोगों के दिमाग में फर्क नहीं करता है वो सभी जातियों के लोगों में बराबर दिमाग देता है इसलिए हमें भी किसी विशेष जाति के लोगो को प्राप्त अंकों में कोई छुट नहीं देनी चाहिए.

यदि आप सब चाहते है कि देश का विकास होना चाहिये तो इस आरक्षण नाम की बिमारी को जड़ से उखाड़कर फैकना होगा. ऐसा करने से केवल योग्य लोग ही नौकरी प्राप्त कर सकेंगें. हम अपने घर के लिए जब मिट्टी का घड़ा भी खरीदते है तो उसे भी परखकर लेते है कहीं वह बेकार तो नहीं है लेकिन यहाँ तो देश के विकास का सवाल है.
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