परीक्षा के दिनों में अपनी सेहत का ख्याल कैसे रखें Pariksha ke dino me apni sehat ka khyal kaise rakhen

परीक्षा के दिनों में विद्यार्थी स्कूल से ज्यादा घर में रहता है लेकिन परीक्षा का दबाव विद्यार्थी पर बना रहता है। ऐसे में कई बार वह इसे बोल कर जाहिर नहीं कर पाता है। लेकिन अगर कोई शारीरिक परेशानी हो रही है तो अभिभावकों को उस पर ध्यान देना चाहिए।

 

इन दिनों हर युवा भी परीक्षा और आगे करियर को लेकर परेशान है। अभिभावकों को परीक्षा के दिनों में हो रहे अपने बच्चे के मनोवैज्ञानिक लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इससे पढ़ाई के साथ ही सेहत पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। परीक्षा का तनाव अगर छात्र को परेशान कर रहा है तो उनसे बात करें। यदि आपको बच्चे में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे तो नजर अंदाज ना करें।

शारीरिक लक्षण:-
  • लगातार सिर दर्द रहना।
  • बदन दर्द होना।
  • पाचन शक्ति कमजोर हो जाना।
  • साँस लेने में तकलीफ होना।
  • अस्थमा के मरीजों को बार-बार अस्थमा के अटैक पड़ना।
  • तनाव में बेचैन रहना।
  • ठीक से लिख न पाना।
  • कुछ भी याद न रहना।
मनोवैज्ञानिक लक्षण:-
  • पढ़ाई में मन न लगना।
  • ज्यादा टीवी देखना।
  • ज्यादा सोना।
  • जिद्दी चिड़चिड़ा होना।
  • हताश होना।
  • आक्रोश से भरे रहना।
  • खाने और सोने की आदतों में ज्यादा बदलाव दिखना।
  • अकेले रहना पसंद करना।
  • बातचीत बंद कर देना।
यदि ऐसे लक्षण दिखाई दे तो क्या करें?
  • अच्छी नींद लें।
  • अगर सोने में लगातार दिक्कत आ रही है तो अपने डॉक्टर से बात करें।
  • आरामदेह व्यायाम व योगा करें।
  • बाहरी खेलों को प्राथमिकता दें।
  • खानपान का विशेष ख्याल रखें। 
  • घर में सकारात्मक वातावरण बना कर रखें।
  • विद्यार्थी पर अनावश्यक दबाव न बनाए।
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