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ये पढ़कर लड़का होने की दवा लेना भूल जायेंगे Ye padhkar ladka hone ki davaa lena bhul jayenge

प्रिय दोस्तो, हर माता - पिता की इच्छा होती है कि उन्हें पुत्र की प्राप्ति हो. लड़का ही वंश को आगे बढ़ाता है. बेटा ही बुढ़ापे का सहारा बनेगा. लड़का मुखाग्नि देगा तभी पिता को स्वर्ग की प्राप्ति होगी. लड़की को कोई जन्म देना नहीं चाहता है सब यही सोचते है कि अगर ग़लती से भी लड़की ने जन्म ले लिया तो उसका बोझ उठाना पड़ेगा.


पुत्र की मोहमाया मे माता-पिता पुत्र को सर उठा कर रहने के काबिल बनाने के लिए अपना सब कुछ लगा देते है. किंतु वही पुत्र ने अपने ही माता-पिता को घर से निकाल कर मरने हेतु छोड़ देता है. घर छोड़ने के बाद बुढ्ढे माता - पिता को अपना जीवन बिताने के लिए वृद्ध आश्रम में रहना पड़ता है और वह बेटा देखने तक भी नही जाता है कि उसके माता पिता किस हालत मे हैं. 

आप किसी भी वृद्धाश्रम मे चले जाकर देख लीजिये. 70 प्रतिशत लोग आपको वहाँ पर ऐसे मिलेंगे जिनके लड़के तो हुए लेकिन लड़कियां नहीं थी. अब आप ही सोचिये कि बुढ़ापे का सहारा क्या केवल लड़का ही होता है? यदि हाँ तो उन लोगो को वृद्ध आश्रम में क्यों रहना पड़ता है जिनके घर लड़के पैदा हुए है. माँ - बाप ने सारी उमर में कमाकर घर बनाया बेटे ने बड़ा होते ही घर से निकाल दिया. इससे अच्छा तो यहीं होता कि वह बेटा जन्म ही नहीं लेता.

शास्त्रों मे वर्णित है की कन्या दान से बड़ा कोई दान नहीं है. कन्या दान करने वाले पिता के लिए स्वर्ग मे स्थान सुरक्षित हो जाता है एवं जिसे कन्या रूपी रत्न संतान के रूप मे प्राप्त होता है, माता लक्ष्मी की कृपा उस घर मे बनी रहती है. इसलिए आपके घर में लड़का या लड़की कोई भी पैदा हो उसे भगवान का आशीर्वाद समझ कर ख़ुशी से स्वीकार कर लें.

"बच्चा होने के उपाय, लड़का होगा या लड़की, पेट मे लडका है या लड़की पहचानने के लक्षण, लड़का पैदा करने के नियम और दवाएं" ये सब का भाव ना रखे. मेरा हर भाई बहन से हाथ जोड़ कर विनम्र निवेदन है की पुत्री जन्म ईश्वर का अनमोल तोहफा है. इसे पूरे दिल से स्वीकार कीजिए. आपका घर खुशियों से भर जाएगा. जितना स्नेह एक पुत्री अपने पिता से करती है उतना पुत्र कभी नहीं कर सकता. अतः हाथ जोड़ कर दोबारा यही निवेदन है की पुत्र एवं पुत्री मे भेद ना करें.

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