अगर माँ की जली उंगलियो को देख लेते, तो भूख उड़ गई होती

परिन्दे से किसी ने पूछा-
क्या आपको गिरने का डर नही लगता?
परिन्दे ने क्या गजब का जवाब दिया-
''मै इन्सान नही जो ज़रा सी ऊँचाई पा कर अकड़ जाऊ"

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जली रोटियाँ देखकर बहुत शोर मचाया तुमने...
अगर माँ की जली उंगलियो को देख लेते, तो भूख उड़ गई होती...

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सहने वाला जब जुल्म सह कर भी मुस्कुरा दे,
तो उस इंसान का बदला खुदा लेता है....
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कैसे मै सम्मान करु गाँधी वाली सीखों का ...
मै तो कर्जदार हूँ भगत सिंह की चीखों का ...
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होती आरती, बजते शंख, पूजा में सब खोए है,
मंदिर के बाहर तो देखो, भूखे बच्चे सोए है...
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ज़रूर कोई सोने की कलम से लिखता होगा,
उन पत्थरो का भी नसीब,
जो होते तो राह के पत्थर जैसे ही है,
पर मंदिर मे पूजे जाते है....
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जो लोग दिल के अच्छे होते है,
दिमाग वाले उनका जमकर फायदा उठाते है।

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