जीवन में आने वाले दुखों की वजह है इच्छाएँ Jivan me aane vale dukhon ki vajah hai chchhayen

हर इन्सान इच्छाओं से भरा पड़ा है। किसी को धन की इच्छा है। कोई इन्सान नाम और शौहरत कमाने की इच्छा रखता है। काम की इच्छा रखने वालों की भी कमी नहीं है। बड़ा बंगला और बड़ी गाड़ी आदि प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले भी लाखों मिल जाएँगे। परन्तु इच्छाएं कभी भी ख़त्म नहीं होती है।

 

अगर इन्सान की कोई इच्छा पूरी हो भी जाती हैं तो इन्सान की इससे भी अधिक पाने की इच्छा जागृत हो जाती है। इच्छाओं की वजह से दुःख मिलने का सिर्फ यही कारण है, मन बैचैन रहता है और जीवन कष्टपूर्ण हो जाता है।

आप यदि काफी बड़ा बंगला बनवा लेते है और यदि किसी दिन आपके बंगले के बगल में किसी ने आप से भी शानदार और बड़ा बंगला बना लिया तो आपकी परेशानी और इच्छा उसी समय बढ़ जाएगी। आपको आपके द्वारा बनवाया गया शानदार बंगला बेकार लगने लगेगा।

हमे कोई वस्तु अच्छी लगने लगे और हम अपने मन में उसे पाने की इच्छा जगा बैठें तो हम उसे पाने कि कोशिश करेंगें ऐसे में हमारा साथ देने वाले हमारे दोस्त और रुकावट डालने वाले हमें दुश्मन दिखने लगेंगे। किसी वस्तु के लिए ही हम दुश्मन बनाने लगेंगें तो हमें सुख कैसे मिलेगा।

आज हम हजारों में कमाते है तो हमारे मन में इच्छा पैदा होती है कि हम लाखों में कमाएं। जैसे ही कल हम लाखों में कमाने लगेंगें तो हमारी इच्छा और अधिक बढ़ जाएगी, फिर हम सोचेंगें की करोडो में कमाई होनी चाहिये। इच्छाएँ कभी ख़त्म नहीं होती है इन इच्छाओं को पूरा करते - करते इंसान का जीवन चक्र ही पूरा हो जाता है।

यदि आप अपने जीवन में सुख पाना चाहते है तो अपनी इच्छाओं को छोटा रखें। जो भगवान दें रहा है उसी में खुश रहें। दिन - दुखियों की मदद करें। ऐसा करने से आपको कभी दुख नहीं होगा।

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