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पढियें - पेशाब में जलन रोकने के घरेलू उपचार Padhen - Peshab me jalan rokne ke gharelu upchar

महिलाओं और पुरुष दोनों को ही पेशाब में जलन होना आम समस्‍या है। कभी-कभी पेशाब करने के लिए बहुत जोर लगाना पड़ता है और पेशाब थोड़ी-थोड़ी मात्रा आता है तथा पेशाब में भारी जलन भी होती है। इसे आयुर्वेद की भाषा में मूत्र कृच्छ कहते है। इसे नजर अंदाज करना काफी नुकसान दायक साबित हो सकता हैं।

 

गुर्दों का काम है खून को साफ करना। खून में जो जलीय अंश हों, उन को गुर्दे निकाल देते हैं। यही जलीय अंश मूत्राशय से हो कर, मूत्र-नली से पेशाब बन कर बाहर आते हैं। जिस व्यक्ति के गुर्दे ठीक हैं, उसे कोई तकलीफ नहीं होती। उस का रक्त शुद्घ रहता है। पेशाब ठीक उतरता है।

पेशाब में जलन होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे -
  • मूत्र पथ संक्रमण।
  • किडनी में स्‍टोन या डीहाइड्रेशन।
  • दूषित पानी पीना।
  • दूषित भोजन खाते रहना।
  • अधिक मिर्च मसाले।
  • खट्टे व गर्म तासीर वाले आहार।
  • धूम्रपान की लत।
  • शराब का सेवन।
  • नशीले पदार्थों का सेवन।
  • जरूरत होने पर भी पेशाब व मल को त्यागने नहीं जाना आदि।
पेशाब में जलन रोकने के घरेलू उपचार :-
  • खूब सारा पानी पिये। पेशाब करने के बाद भी अधिक देर तक जलन हो तो आपको मूत्र पथ संक्रमण है।
  • खट्टे फल यानी की सिट्रस फ्रूट खाइये क्‍योकि इसमें सिट्रस एसिड होता है जो कि मूत्र संक्रमण पैदा करने वाले बैक्‍टीरिया को मारता है।
  • आमला का रस भी पेशाब की जलन को ठीक करने में सहायक है। या इलायची और आंवले का चूर्ण समान भाग में मिलाकर पानी से पीने पर मूत्र की जलन ठीक होती है।
  • नारियल का पानी डीहाइड्रेशन तथा पेशाब की जलन को ठीक करता है। आप चाहें तो नारिल पानी में गुड और धनिया पाउडर भी मिला कर पी सकते हैं।
  • पलास के फूल सूखे या हरे पानी के साथ पीसकर थोड़ा सा कलमी शोरा मिलाकर नाभि के नीचे पेडू पर लगाने से 10 मिनट में पेशाब खुलकर आने लगता है।
  • आधा गिलास चावल के माण्ड में चीनी मिलाकर पिलायें, इससे जलन दूर होगी।
  • अनार का शर्बत नित्य दो बार पियें। पेशाब की जलन ठीक हो जायेगी।
  • फालसा पेशाब की जलन को दूर करता है।
  • पाँच बादाम की गिरी भिगोकर छीलकर इसमें सात छोटी इलाइची स्वादानुसार मिश्री मिलाकर पीसकर एक गिलास पानी में घोलकर पियें।
  • संभोग करते वक्‍त प्रोटेक्‍शन बरते क्‍योंकि योनि में सूखापन आ जाने की वजह से पेशाब में जलन होने लगती है। यदि आप लुब्रिकेंट का प्रयोग कर रहे हैं तो वाटर बेस वाले लुब्रिकेंट का प्रयोग करें ना कि रसायन युक्‍त का।
  • एक पानी के गिलास में 1 चम्‍मच धनिया पाउडर मिला कर रातभर के लिये भिगो दें। सुबह उसे छान लें और उसमें चीनी या फिर गुड मिला कर पी लें।
  • जननांग की स्वच्छता बनाए रखें। कई बार, योनि या लिंग में संक्रमण होने की वजह से भी मूत्र मार्ग को प्रभावित करते हैं। यदि आपको यह समस्‍या हो चुकी है तो अब से कुछ सावधानियां बरते जैसे, दिन में 2-3 बार जननांग को धोएं।
  • यदि आपको किडनी स्‍टोन है तो पेशाब में जलन होगी। इसके लिये आपको बीयर पीनी चाहिये जिससे कि किडनी का स्‍टोन गल सके। लेकिन सुबह बीयर पीने से डीहाइड्रेशन हो सकता है इसलिये इसे नारियल पानी के साथ मिला कर पीजिये।
  • ताजे मक्के के भुट्टे पानी में उबालकर, उस पानी को छानकर, मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन में लाभ होता है।
  • पेशाब की जलन में कच्चे दूध में पानी मिलाकर रोज पिएं लाभ होगा।
  • ठंडे पानी या बर्फ के पानी में कपड़ा भिगोकर नाभि के नीचे बिछायें, रखें। लाभ होगा।
  • कलमी शोरा व बड़ी इलायची के दाने महीन पीसकर दोनों चूर्ण समान मात्रा में लाकर मिलाकर शीशी में भर लें। उसके बाद एक भाग दूध व एक भाग ठंडा पानी मिलाकर फेंट लें, इसकी मात्रा 300 एमएल होनी चाहिए। एक चम्मच चूर्ण फांककर यह फेंटा हुआ दूध पी लें। यह पहली खुराक हुई। दूसरी खुराक दोपहर में व तीसरी खुराक शाम को लें। बस दो दिन तक यह प्रयोग करने से पेशाब की जलन दूर होती है व मुँह के छाले व पित्त सुधरता है। शीतकाल में दूध में कुनकुना पानी मिलाएँ।
  • ककड़ी गुणों का भंडार है। यह शीतल व पाचक है। ककड़ी खाने से पेशाब खुलकर आने लगती है। ककड़ी खाने के बाद 20 मिनट तक पानी न पिएं।
  • पिसी हुई हल्दी को एक-एक चम्मच सुबह-शाम लेने से लाभ होता है।
  • तीन आँवलों का रस पानी में मिलाकर सुबह-शाम चार दिन पीने से बार-बार पेशाब जाना बंद हो जाता है।
  • एक केला खाकर आँवले के रस में शक्कर मिलाकर पिएं। लाभ होगा। अकेला केला खाने से भी लाभ होता है।
  • सेब खाने से रात को बार-बार पेशाब जाना बंद हो जाता है।
  • बूढ़े आदमी बार-बार पेशाब जाते हों तो नित्य छुआरे खिलायें। रात को छुआरे खाकर दूध पिएं।
  • रात को बार-बार पेशाब जाना शाम को पालक की सब्जी खाने से कम हो जाता है।
  • एक छटाँक भुने, सिके चने खाकर, ऊपर से थोड़ा सा गुड खायें। दस दिन लगातार खाने से बहुमूत्रता कम हो जाती है। वृद्धों को अधिक दिन तक यह सेवन करना चाहिए।
  • 250 ग्राम गाजर का रस नित्य तीन बार पिएं। पेशाब का रंग पीला हो तो शहतूत के रस में शक्कर मिलाकर पीने से रंग साफ हो जाता है।
  • गुर्दे की खराबी से यदि पेशाब बनना बंद हो जाए तो मूली का रस दो औंस प्रति मात्रा पीने से वह फिर बनने लगता है।
  • नींबू के बीजों को पीसकर नाभि पर रखकर ठण्डा पानी डालें। रुका हुआ पेशाब होने लगता है।
  • जीरा और चीनी को समान मात्रा में पीसकर दो चम्मच फंकी लेने से लाभ होता है।
  • केले के तने का रस चार चम्मच, घी दो चम्मच मिलाकर नित्य दो बार पिलाने से पेशाब खुलकर आता है।
  • यदि बार-बार और अधिक मात्रा में पेशाब आए, प्यास लगे तो आठ ग्राम पिसी हुई हल्दी नित्य दो बार पानी से फंकी लें। लाभ होगा। 
  • एक कप तेज गर्म पानी में से आधा कप पानी अलग लेकर इसमें गुलाबी रंग के सदाबहार के तीन फूल पाँच मिनट तक पड़े रहने दें। पाँच मिनट बाद फूल निकाल कर फेंक दें और पानी नित्य सात दिन पिएं और आधा कप गरम पानी और पिएं, लाभ होगा।
  • जामुन की गुठली का चूर्ण आधा चम्मच शाम को पानी के साथ लेने से पेशाब में शर्करा आना ठीक हो जाता है। जामुन की गुठली और करेले सुखाकर समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें और एक चम्मच सुबह शाम पानी से फंकी लें।
  • 15 ग्राम करेले का रस, 100 ग्राम पानी में करीब 3 महीने पिलाना चाहिए। छाया में सुखाए हुए करेलों का चूर्ण 6 ग्राम दिन में एक बार लेने से मूत्र में शर्करा आना बंद हो जाती है।

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