सोच समझकर और मीठे बोल बोलने के फायदे Soch samajh kar aur mithe bol bolne ke fayde

प्रिय दोस्त, हम पूरा दिन बोलते रहते है लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि हम जब बोलते है तो इसका दूसरों पर क्या प्रभाव पड़ता है और लोग हमारे बारे में क्या सोचते है. हमारे मुंह से निकला एक - एक शब्द हमारे चरित्र और व्यवहार का परिचय देता है.


यदि हम कोई गलत लफ्ज बोल देते है तो हम दूसरों के दिल में घृणा के पात्र बन जाते है और यदि हम मीठे वचन बोलते है तो किसी का भी दिल जीत सकते है इसलिए हमेशा अपने मुंह से कोई भी शब्द निकालने से पहले उस पर सोचना जरुरी है. आपने सुना भी होगा कि "पहले तोलो फिर बोलो". दोस्त शब्दों को तोलने के लिए तराजू की जरूरत नहीं होती. शब्दों को तोलने के लिए दिमाग का प्रयोग करना पड़ता है.

 

कड़वा बोलने से अच्छा है कि चुप ही रहा जाए क्योंकि कुछ बातें कमान से निकले तीर की तरह निकाल जाती हैं और बाद मे उन पर पछतावा होता है. लेकिन बात मुंह से निकालने से पहले यदि सोचा जाए तो उसके फायदे भी होते हैं.

सोच - समझकर बोलने के फायदे -
  • ऐसा व्यक्ति घर, मोहल्ले और समाज में एक अच्छे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है.
  • ऐसा व्यक्ति जहाँ भी जाता है वहीँ सम्मान प्राप्त करता है.
  • ऐसे व्यक्ति को कभी भी बेइज्जत नहीं होना पड़ता है.
  • ऐसा व्यक्ति बड़े मामलो को भी केवल वार्तालाप के माध्यम से सुलझा सकता है.
  • ऐसा व्यक्ति जिससे भी बातचीत करता है अपनी वाणी के कारण दिल में बस जाता है जिससे उसके प्रसंशको की संख्या बढ़ती रहती है.
  • ऐसे व्यक्ति की बातें सुनकर लोग बोर नहीं होते है बल्कि उसके मुंह से निकले शब्दों को सुनने के लिए बेचैन रहते है.
दोस्तों कहते है कि - "कौवा क्या ले जाए और कोयल क्या दे जाए". लोग कोयल की आवाज सुनने के लिए तरस जाते है और कौवे को कंकड़ मारकर भगा देते है इसलिए जब भी बोलो सोच - समझकर और मीठे स्वर में बोलों. इसके लिए कोई पैसे खर्च नहीं करने पड़ते है.

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