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जानिये - गुस्से में लोग चिल्लाते क्यों है Janiye - gusse me log chillate kyo hai

एक बार एक पहुंचे हुए संत किसी गाँव में आए। सभी लोगों ने उनका स्वागत किया और उनकी बहुत सेवा की। एक दिन वे एक पेड़ के नीचे कुछ लोगों के साथ बैठे थे। उसी समय उन्हें दो इंसानों के झगड़ने और चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। संत उनके पास गए और उन्हें ऐसा ना करने को कहा।

 

संत की बात मानकर वो दोनों संत हो गए। संत और सभी लोग वापिस पेड़ के नीचे आकर बैठ गए। अचानक एक व्यक्ति ने संत महात्मा से पूछा - महात्मा जी जब लोग गुस्से में होते है तो वो चिल्लाते क्यों है?

संत महात्मा बोलें - जब दो लोग एक दूसरे से नाराज होते हैं तो उनके दिलों में दूरियां बहुत बढ़ जाती हैं। जब दूरियां बढ़ जाएं तो आवाज को पहुंचाने के लिए उसका तेज होना जरूरी है। दूरियां जितनी ज्यादा होंगी उतना ही तेज चिल्लाना पड़ेगा। दिलों की यह दूरियां ही दो गुस्साए लोगों को चिल्लाने पर मजबूर कर देती हैं। वह आगे बोले, जब दो लोगों में प्रेम होता है तो वह एक दूसरे से बड़े आराम से और धीरे-धीरे बात करते हैं। प्रेम दिलों को करीब लाता है और करीब तक आवाज पहुंचाने के लिए चिल्लाने की जरूरत नहीं। जब दो लोगों में प्रेम और भी प्रगाढ़ हो जाता है तो वह खुसफुसा कर भी एक दूसरे तक अपनी बात पहुंचा लेते हैं। इसके बाद प्रेम की एक अवस्था यह भी आती है कि खुसफुसाने की जरूरत भी नहीं पड़ती। एक दूसरे की आंख में देख कर ही समझ आ जाता है कि क्या कहा जा रहा है।
 
संत सभी की और देखते हुए बोले:- अब जब भी कभी बहस करें तो दिलों की दूरियों को न बढ़ने दें। शांत चित्त और धीमी आवाज में बात करें। ध्यान रखें कि कहीं दूरियां इतनी न बढ़े जाएं कि वापस आना ही मुमकिन न हो।

यह सुनकर सभी लोग आश्चर्य चकित रह गए और जिन दो लोगों में झगड़ा हुआ था, महात्मा के पास आए और कभी झगड़ा ना करने का वचन दिया।

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