जानिए एक कमजोर बच्चा कैसे बना अव्वल Ek kamjor bachcha kaise banaa avval

एक साहिल नाम का विद्यार्थी था। वह पढ़ाई में बहुत लापरवाह था। माँ - बाप ने बहुत समझाया पर वह टस से मस नहीं हुआ। टीचर उसको बहुत समझाते पर उसके कान पर जूं तक नहीं सरकती थी। वो एक कान से सुनता और दुसरे से निकाल देता था। लैक्चर उसके सिर के ऊपर से ही निकल जाता था।

क्यों बढ़ते जा रहे है बाल मजदूर Kyo badhte ja rahe hai baal majdur - ek soch

आज विश्व में लगभग 11 करोड़ बाल मजदूर हैं जो अत्यंत भयावह परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार समिति द्वारा ऐसे बच्चों का सर्वेक्षण किया गया। इस रिर्पार्ट में यह बात सामने आई है कि किस प्रकार से विश्व के अविकसित राष्ट्रों में बच्चों का शोषण हो रहा है, और उन्हें अपना व अपने मां-बाप का पेट भरने के लिये जानवरों से भी बदतर जिन्दगी बसर करनी पड़ रही हैं।

आखिर क्यों शोषित हो रहा है बाल मजदूर Aakhir kyon shoshit ho rahaa hai baal majdur

एक दिन मैं नगर के सुप्रसिद्ध होटल में चाय पीने पहुंचा। वहां दो बच्चे अपने धुन में मस्त होकर काम कर रहे थे। इनमें से एक टेबिल से गिलास प्लेट वगैरह उठा रहा था और दूसरा, टेबिल साफ कर चाय पानी सप्लाई कर रहा था। इसी समय उसके हाथ से कांच का गिलास छूटकर नीचे गिर गया और टूट गया।

क्या आप जवाब देते है बच्चों के प्रश्नों का Kya aap jawab dete hai bachchon ke prashno ka

बच्चा अपने जन्म के साथ कुछ पैतृक संपत्तियां लेकर आता है। जिस प्रकार बच्चे अपने माता पिता की अनुकृति पाते है। उसी प्रकार उनके गुणदोष भी उन्हें मिलते हैं। मूल प्रवृत्तियों के अतिरिक्त कुछ प्रवृत्तियां और सहज क्रियाएं उन्हें आयु वृद्धि के साथ-साथ आसपास के वातावरण से प्राप्त होती है।

नुकाशानदायक - मां-बाप के झगड़े और बालमन Maa Baap ke jhagde aur baalman

मैंने सोचा आज रविवार है, चलो चाचा जी के घर चला जाये और यह सोचकर कदम खुद-ब-खुद चाचा जी के घर की ओर बढ़ने लगे। घर पहुंचा तो देखा बच्चे सहमे-सहमे और दुबके हुए है। सारा घर शांत था जैसे कोई तूफान आकर चला गया हो ? चाचा और चाची नजर नही आ रहे थे।

बच्चों के प्रति हम कितने सचेत रहते हैं Bachchon ke prati ham kitna sachet rahte hai

पिछले दिनों मैं एक स्कूल गया। वहां मैं प्राचार्य से बात कर रहा था। इतने में किसी कक्षा से बच्चे को डांटने की आवाज आने लगी। मैं ध्यान से सुनने लगा कि आखिर किस बात के लिए बच्चे को डांट पड़ रही है। मैडम बच्चे को होमवर्क पूरा नहीं करने के लिए डांट रही थी। अंत में बच्चे को दो पीरियड खड़े होकर गुजारना पड़ा।

समझें भावनाओं से भरा बच्चों का संसार Bhavnao se bharaa bachchon ka sansar

भावनाओं का बच्चों के जीवन से प्रत्यक्ष सम्बन्ध होता है। बाल मनोवैज्ञानिकों ने इस विषय पर प्रर्याप्त शोध कार्य करके एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार बच्चों के सामाजिक एवं भावनात्मक विकास का व्यापक प्रभाव उनके शारीरिक व मानसिक विकास पर पड़ता है।

बच्चे के कम खाने की आदत आप परेशान Bachchon ki kam khane ki aadat aap preshan

पिछले दिनों जब मेरा मित्र जीवन सपरिवार यहां आया था। दो दिन वे लोग यहां रहे मगर मुझे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि उसका दो साल का बेटा अमित कुछ भी नहीं खाता था कुछ मूड बन गया तो थोड़ा सा लिया अथवा दूध पी लिया अन्यथा ना-ना करते रहता।

बच्चा अस्वाभाविक शरारत तो नहीं करता Bachcha asvabhavik shararat to nahin karta

जी हां! कहीं आपका बच्चा अत्यधिक शरारत तो नहीं करता ? बच्चों में अत्यधिक शरारत एक तरह की बीमारी का लक्षण है, इस बीमारी को हाइपरकिनेसिस कहते हैं। बहुत संभव है कि यदि एक बच्चा जो बेहद अधीर दिखे, बार बार उठे बैठे, चीजों को तोड़कर फेंके, अधूरा काम करे, चिड़चिड़ा और अकेले रहने वाला हो, तो ऐसे बच्चे को हाइपरकिनेसिस हो सकता है, कहना न होगा कि ऐसे बच्चे मां को तो रूला ही देते हैं।

बच्चे कहीं कुंठा और तनाव में तो नहीं हैं Bachchen kahin kuntha aur tanav me to nahin hai

उस दिन अचानक तृप्ति को रोते देखकर मैं चौंक उठा रोते हुए वह बड़बड़ा रही थी, मम्मी आप गंदी हो मुझे प्यार नहीं करती जब देखो मुझे मारती रहती हो डांटती हो और वह फिर रोने लगी। मैंने देखा थोड़ी देर बाद वह चुप होकर मिठाई खाती हुई खेलने लगी। मगर उसकी बड़बड़ाहट मुझे व्यथित किये जा रही थी।

जानिए - क्या हमारी नवागत पीढ़ी दिशाहीन है Kya hamari navagat pidhi dishahin hai

पिछले दिनों मेरी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और किसी शासकीय महाविद्यालय में प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनसे औपचारिक चर्चा के बाद बात आज की नवागत पीढ़ी की दिशाहीनता पर चल पड़ी। इस पर वे खीज भरे स्वर में कहने लगे-’कैसे समझाएं इस नवागत पीढ़ी को, ये तो हमारी कुछ सुनते ही नहीं। जब देखो, अपने मन की ही करते हैं।’

आइये समझे बच्चे आखिर बिगड़ते क्यों हैं Aaiye samjhe bachchen bigdte kyo hai

पिछले दिनों मैने अपने पड़ोस में रह रहे एक दम्पत्ति को देखा कि वे हर छोटी-मोटी बात पर अपने दोनों बच्चों को इतना मारते है कि देखने वालों का पसीना छूट जाये। जब वे शुरू शुरू में यहां आये थे तब अपने बच्चों को मारने के साथ साथ रस्सी से से घंटों बांधे रखते थे।

ये ना भूलें कि बच्चे सब आपसे ही सीखते हैं Ye na bhule ki bachche sab aapse hi sikhte hai

बच्चों का नन्हा सा मस्तिष्क अनेक प्रश्नों से भरा होता है। उनका प्रश्न करना, उनका जिज्ञासु होना, उनके मस्तिष्क के विकास की पहली सीढ़ी है। ऐसे बच्चे जिनमें किसी वस्तु को जानने की इच्छा नहीं होती, कोई भी कार्य उन्हें आकर्षित नहीं करता ऐसे बच्चे सामान्य स्तर के होते है।

जरा समझे कि बच्चों से आप कैसे बोलते हैं Jaraa samjhe ki aap bachchon se kaise bolte hai

एक बार मैं अस्पताल में इलाज करवा रहे एक परिचित से मिलने गया। बच्चों के वार्ड से गुजरते वक्त मैने एक सुंदर सा बच्चा अपने बिस्तर पर गुमसुम बैठा देखा। मुझे उनका इस तरह गुमसुम रहना अजीब सा लगा। मेरे पैर खुद-ब-खुद उसके बिस्तर की ओर बढ़ने लगे। इसी समय डॉक्टर साहब राउंड पर आये डॉक्टर से मैं पूर्वपरिचित था।

जानिये - पति-पत्नी आखिर क्यों लड़ते हैं पढ़े - Pati Patni aakhir kyon ladte hai

शादी के कुछ वर्षो बाद अक्सर पति-पत्नी के बीच एक पुरानापन आ जाता है। एक दूसरे की बाहों में समा जाने की पहले जैसी उमंग, दिन भर के तपते वियोग के बाद शाम के मिलन का वह गर्म इंतजार, हर बात में उनसे प्रशंसा पाने की ललक....। गृहस्थी का चक्कर कुछ ऐसा चलता है कि न जाने कहां चला जाता है सब कुछ, सारी उमंग जैसे ठंडी पड़ती जाती है।

गर्भ में बच्चा और मां की भावनाए Garbh me bachcha aur maa ki bhavnaye

बात तब की है जब तृप्ति पैदा नहीं हुई थी। उस दिन जब मैं दैनिक अखबार दुकान से मंगवाया तब चाचा जी ने अखबार भेज तो दिया मगर पहले पेज में एक सचित्र समाचार काट कर। इस समाचार में किसी विकलांग नवजात शिशु की तस्वीर छपी थीं जो कुछ देर बाद मर गया था।

बच्चे का आगमन कितना सुखद कितना दुखद Bachchon ka aagman sukhad ya dukhad

आखिर क्या सोचते होगें वे लोग ? रूआंसे स्वर में कल्याणी ने मुझसे कहा। ’’जब से तृप्ति और टीसू हुये हैं, हम लोग केवल एक बार शशि और जस्सू के घर जा सके हैं। इससे पहले रोज का मिलना-जुलना और घूमना होता था। इतने प्यार से वे हमें अपने हर प्रोग्राम में बुलाते है और एक हम हैं कि बस उस पार्टी के बाद जा नही पाये।"

पढिये - बच्चों की परीक्षा और मम्मी की परेशानी Padhiye - Bachchon ki pariksha aur mammy ki pareshani

पिछले दिनों मैं सविता के घर गया। शाम को घूमने और मूड़ फ्रेश करने का समय होता है। इस समय सविता और उनके बच्चों को कमरे में देखकर मुझे बेहद आश्चर्य हुआ। आज भी उस दिन का दृश्य मुझे याद है-बच्चे कमरे में पुस्तक लिये पढ़ने का अभिनय कर रहे थे और सविता बाहर बरामदे में बैठी थी, जैसे चौकीदारी कर रही हो। मुझे यह सब देखकर बड़ा विचित्र लगा था।

शादी के तुरंत बाद ही मां बनने में जल्दी न करें Shadi ke turant baad hi maa banne ki koshish na kre

शादी के एक-दो माह बाद ही नव विवाहिताएं गर्भवती हो जाती है। यह स्थिति किसी भी दृष्टि से उचित नहीं हैं शादी के एक-दो साल बाद ही आपकों नए मेहमान के आगमन की बात सोचनी चाहिए, ताकि आप उसका स्वागत भली प्रकार से कर सकें। पिछली गर्मी की बात है, वार्षिक परीक्षाएं समाप्ति की ओर थीं।

जानिए - पढ़ने से क्यों कतराता है बच्चों का मन Padhne se kyo katrata hai bachchon ka man

पिछले दिनों मै अपने एक मित्र के घर गया तो देखा कि उनका दस वर्षीय बेटा प्रियतोष स्कूल से आया था और वह सिर झुकाये खड़ा हो गया जैसे उसने कुछ अपराध किया हो। उसकी मम्मी ने पूछा- ‘‘क्या बात है’’ ? प्रियतोष ने डरते-डरते परीक्षा परिणाम अपनी मम्मी के हाथ में दे दिया।

जरुरी - बच्चों में प्रतिभा के अंकुर को पनपने दें Bachchon me pratibha ke ankur ko panpane den

जब माता पिता अपने बच्चों का भविष्य और कार्य क्षेत्र स्वयं तय करते है तो बच्चे उस कार्यक्षेत्र में आधिकांशतः असफल होते हैं। बच्चे अक्सर शिकायत करते है कि उनकी इच्छा तो इंजीनियर बनने की थी, लेकिन उनके पिता जी उन्हें डॉक्टरर बनाना चाहते थे- ‘बगैर रूचि के मैं इस फील्ड में कैसे काम कर सकता हूँ?’’

जानिए - डांटने फटकारने से नही सुधरते हैं बच्चे Datne fatkarne se nahin sudhrate hai bachche

एक नन्हें बच्चे के लिए माता-पिता की गोद ही सब कुछ होता है। ढाई-तीन साल के होते-होते वह संसार के विविध क्रिया कलापों से परिचित हो जाता है, लेकिन यह परिचय उसकी घबराहट को बढ़ाता है। मां का कोमल प्यार भरा स्पर्श, उसकी स्नेहिल दृष्टि, पिता की बांहों का घेरा उसे सुरक्षा का आश्वासन देता है।

जानिये - बस्तों के बोझ तले कुंठित होता बचपन Padehen - Baston ke bojh tale kuthit hota bachpan

जुलाई माह के आते ही जहां बरसात होने लगती है और स्कूल खुल जाते हैं, वहीं अभिभावक गण अपने बच्चों को स्कूलों में भर्ती कराने के लिए चक्कर काटने लगते हैं। कभी कभी इसके लिए अभिभावक अपने बच्चों की उम्र घटा या बढ़ा देते हैं। वर्तमान परिवेश में लोगों में अंग्रेजी के प्रति कुछ ज्यादा मोह है।

बच्चों में संस्कार कैसे डालें जिससे वो अच्छे बने Bachchon me sanskar kaise daale jisse vo achchhe bane

उस दिन अचानक ही तृप्ति को रोते देखा मेरा ध्यान उसकी तरफ गया। रोते-रोते वह बड़बड़ा रही थी- ‘‘मम्मी, आप हमें कभी प्यार नहीं करतीं, हमेशा मारती रहती हैं...।’’ इसी तरह की एक और घटना मुझे याद आ रही है। उस परिवार में मां-बाप के अलावा तीन बच्चे हैं। बड़े लड़के प्रभात को मैं बचपन से जानता हूँ।

आइये समझे - बच्चों की हरकतें और हमारा कर्तव्य Bachchon ki harkate aur hamara kartavya

पिछले दिनों जब मैं घर में चाय की चुस्की ले रहा था, तभी तृप्ति के अचानक रोने की आवाज आई। मैं दौड़कर कमरे में गया। वहां तृप्ति और टीसू आपस में लड़ रहे थे। टीसू, तृप्ति के बाल पकड़कर खींच रहा था और तृप्ति रोये जा रही थी। मैंने दोनों बच्चों को लड़ने से मना किया और तृप्ति के बाल का छुड़ा दिया।

क्या आप बच्चों को अच्छी कहानियां सुनाते हैं Kya aap apne bachchon ko kahaniyan sunaate hai

उस दिन रात में अचानक एक मित्र के यहां जाना हुआ। वहां पहुंचा तो देखा कि उनके बच्चे स्वाति और टीसू रो रहे हैं और उनके पापा बच्चों को डांटने के बाद अपना गुस्सा उसकी मम्मी पर उतार रहे थे कि बच्चों को तुमने बिगाड़ दिया है...जब भी आफिस से आता हूं बच्चे सर में सवार हो जाते हैं और कहानी सुनाने के लिये जिद करते हैं।

आप अपने बच्चों को अच्छी आदतें सिखायें Aap apne bachchon ko achchhi aadte sikhaye

पिछले दिनों जब मैं कालेज से लौटा तो देखता क्या हूं कि तृप्ति और टीसू अपनी मम्मी को रोटी बनाते देख कर रसोईघर में घुसकर आटे की लोई बनाकर उलटे-सीधे बेल कर सेकने के लिए तंग कर रहे थे और उनकी मम्मी काम में बाधा पड़ने के कारण झुंझला कर उन्हें डांट रही थी।

क्या आपका बच्चा स्कूल नहीं जाना चाहता है Kya aapka bachcha school nahin jana chahta hai

नये साल की शुरूआत के साथ-साथ आपके बच्चे के जीवन में एक चीज नयी आती है-स्कूल ! या तो स्कूल नया होता है या वह नयी कक्षा में जाता है। यही वक्त है जब आपको अपने बच्चे के तरफ ध्यान देना चाहिए- क्या वह स्कूल नहीं जाना चाहता या स्कूल जाने में टाल-मटोल करता है ?

एडनाउ के बारे में जानकारी और पेमेंट का सबूत Adnow ke bare me jankari aur payment ka proof

दोस्तों, आज मैं वेबसाइट और ब्लॉग एडमिन के लिए एक खुशखबरी लेकर हाजिर हुआ हूँ. मैं पहले भी इस वेबसाइट पर आपका अकाउंट बनाने के बारे में पोस्ट लिख चूका हूँ. यह काम मैंने तभी शुरू कर दिया था जब मुझे इस वेबसाइट से पहली पेमेंट मिली थी लेकिन आज मैं आपके लिए इस वेबसाइट से प्राप्त हुई पेमेंट का सबूत भी लेकर आया हूँ क्योंकि अब मैं इस वेबसाइट से दूसरी पेमेंट भी प्राप्त कर चूका हूँ.

टीवी चलाओं मनोरंजन के साथ मच्छर भगाओ TV chalao manoranjan ke saath machchhar bagao

प्रिय दोस्त, गर्मियों के दिनों में हमें अपने घर में और बाहर भी मच्छरों से बहुत परेशान होना पड़ता है लेकिन अब आपको अपने घर में मच्छरों से परेशान होने की दिक्कत में इजाफा मिल सकता हैं क्योंकि अब आपकी परेशानी को ध्यान में रखते हुए उसका हल ढ़ूंढ लिया गया है। इसके लिए आपको अपना टीवी चलाने की जरूरत है.

सहारे को जो नष्ट करता है उसकी दुर्गति होती है Sahare ko nasht karne vale ki durgati hoti hai

प्रिय दोस्त, दुनियां की जो भी वस्तु या जीव जो किसी ना किसी रूप में या किसी भी तरीके से हमारे काम आते है और हमारे लिए जीवन जीने का सहारा बनते है हमें कभी भी उन्हें नष्ट नहीं करना चाहिए और उन्हें नष्ट होने से बचाना भी चाहिए. यदि वो चीजे और वो जीव नष्ट हो गए तो हमारा जीवन भी नष्ट हो जाएगा.

नशे में वाहन चलाकर किसी का जीवन न छीने Nashe me vahan chalakar kisi ka jivan na chhine

माँ मैं एक पार्टी में गया था. तूने मुझे शराब नहीं पीने को कहा था, इसीलिए बाकी लोग शराब पीकर मस्ती कर रहे थे और मैं सोडा पीता रहा. लेकिन मुझे सचमुच अपने पर गर्व हो रहा था माँ, जैसा तूने कहा था कि 'शराब पीकर गाड़ी नहीं चलाना'. मैंने वैसा ही किया. घर लौटते वक्त मैंने शराब को छुआ तक नहीं, भले ही बाकी दोस्तों ने मौजमस्ती के नाम पर जमकर पी.

घरेलु उपचार - केंसर के लिए देशी इलाज Gharelu upchar - Cancer ke liye Deshi ilaaj

दोस्तों कैंसर एक बहुत ही घातक रोग है। यदि समय पर ही इसका इलाज ना किया जाएँ तो यह रोगी की जान ले लेता है। आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से कैंसर पर नियन्त्रण पाने का एक देशी इलाज बता रहें है। इसे जानने के बाद आप इसका खूब प्रचार करें और किसी की जिन्दगी बचाकर पुण्य कमाएं।