जानिए एक कमजोर बच्चा कैसे बना अव्वल Ek kamjor bachcha kaise banaa avval

एक साहिल नाम का विद्यार्थी था। वह पढ़ाई में बहुत लापरवाह था। माँ - बाप ने बहुत समझाया पर वह टस से मस नहीं हुआ। टीचर उसको बहुत समझाते पर उसके कान पर जूं तक नहीं सरकती थी। वो एक कान से सुनता और दुसरे से निकाल देता था। लैक्चर उसके सिर के ऊपर से ही निकल जाता था।

 

एक दिन एक महात्मा साहिल के गाँव आए। साहिल की माँ अपना दुख लेकर महात्मा के पास गई। महात्मा जी ने बच्चे को अपने पास बुलाया और कहा - बेटा, इनमें से क्या खाएगा? खाना एकदम है - 1 किलो अंगूर या 4 किलो का तरबूज! बोल।

साहिल बोला - महाराज मैं एक किलो अंगूर आसानी से खा सकता हूँ। महात्मा बोले बिलकुल ठीक यह तो समझदारी की बात है। थोड़ा - थोड़ा करके तू 1 किलो अंगूर खा सकता है और उसी तरह तरबूज ज्यादा बड़ा होने के कारण तू 4 किलो का तरबूज एकदम खाने में असमर्थ है। है ना?

साहिल बोला - हाँ बाबा जी। फिर महात्मा जी मुस्कुरा कर बोले - अगर तू लगातार अपनी क्लास का काम रोजाना करता रहेगा तो परीक्षा के समय तक तू पूरा याद कर लेगा क्योंकि थोड़ा - थोड़ा पढ़ना आसान है। महात्मा जी आगे बोले - तू सोचता है कि तू उस समय इतना सारा स्लेबस एकदम पढ़ लेगा, इस तरबूज को खाने की तरह यह असंभव है। इसलिए बेटा रोजाना पढों और लगातार आगे बढ़ो।

साहिल के मन में एक और प्रश्न उठा वो बोला - मैं महत्त्वपूर्ण प्रश्न याद कर लूँगा। महात्मा जी ने इस प्रश्न का उत्तर दिया कि आज जो तू विद्यार्थी है कल को अगर तू अध्यापक बनता है और वो ही सवाल या प्रश्न अगर किसी विद्यार्थी ने तेरे से पूछ लिया, जो तू साधारण समझकर छोड़ देगा, उनको तू क्या जवाब देगा। इसलिए सब महत्वपूर्ण है। कुछ भी बेकार नहीं है।

साहिल संतुष्ट हो गया और पढाई में जुट गया। वो समय का भी पाबंध हो गया और उसके बाद साहिल अव्वल नंबर पर आने लगा।

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