सहारे को जो नष्ट करता है उसकी दुर्गति होती है Sahare ko nasht karne vale ki durgati hoti hai

प्रिय दोस्त, दुनियां की जो भी वस्तु या जीव जो किसी ना किसी रूप में या किसी भी तरीके से हमारे काम आते है और हमारे लिए जीवन जीने का सहारा बनते है हमें कभी भी उन्हें नष्ट नहीं करना चाहिए और उन्हें नष्ट होने से बचाना भी चाहिए. यदि वो चीजे और वो जीव नष्ट हो गए तो हमारा जीवन भी नष्ट हो जाएगा.


प्रिय रीडर, आज हम स्वयं अपने हाथों से अपनी उपयोगी चीजों का नाश कर रहें है. यदि ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन हमें इसका बहुत बड़ा अंजाम भी भुगतना पड़ेगा. आइये आज मैं आपको एक छोटी सी कहानी के माध्यम से यह समझाने की कोशिश करता हूँ.

*एक बार एक बकरी के पीछे शिकारी कुत्ते दौड़े। बकरी भागती हुई और जान बचाने के लिए अंगूरों की झाड़ी में घुस गयी।
*अब वह कुत्तों को दिखाई नहीं दी इसलिए कुत्ते आगे निकल गए।
*बकरी ने सोचा कि अब उसे कोई खतरा नहीं है और उसने निश्चिंतापूर्वक अँगूर की बेल खानी शुरु कर दी और जमीन से लेकर अपनी गर्दन पहुचे उतनी दूरी तक के सारे पत्ते खा लिए।
*अब झाड़ी में पत्ते नहीं रहे।
*कुत्ते उसे ढूंढते हुए दोबारा फिर वहां आ गए।
*छिपने का सहारा समाप्त् हो जाने पर कुत्तो ने उसे देख लिया और मार डाला।।
*सहारा देने वाले को जो नष्ट करता है , उसकी ऐसी ही दुर्गति होती है।।
*http://www.merahindiblog.com/ द्वारा जनहित में जारी....

प्रिय पाठक, मनुष्य भी आज सहारा देने वालीं जीवनदायिनी नदियां, पेड़ पौधे, जानवर, गाय, पर्वत आदि को नुकसान पंहुचा रहा है और इन सभी का परिणाम भी अनेक आपदाओ के रूप में भोग रहा है और जब तक इन्हें नष्ट करता रहेगा, परिणाम भोगता रहेगा और एक दिन ऐसा भी आएगा जिस दिन उसे अपनी गलती का अहसास होगा लेकिन शायद उस वक़्त बहुत ही देर हो चुकी होगी और वह चाहकर भी अपने जीवन को बचा नहीं पाएगा। इसलिए मैं यहीं कहूँगा - सुधरने का वक़्त है जाग जा, जीवन बचाने के काम में लाग जा. 

*प्राकृतिक सम्पदा बचाओ।
*अपना कल सुरक्षित बनाओ। 

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