Breaking News
recent
Click here to download
loading...

दुनिया भर की लावैं बुराई और दूसरा काम नहीं Duniya bhar ki lyave burai or dusra kaam nahi

प्रिय दोस्त, आज समाज में भाई-चारा बिलकुल ही नहीं रहा है, इस विषय में आइये जाने कवि क्या कहता है-

पूत सुपात्र सपुत एक भतेरा चाहिएं बीस कुजाम नहीं।
दुनिया भर की लावैं बुराई और दूसरा काम नहीं।टेक

बाप और बेटा सास बहु के काण अर कादे भंग होगे
बहू भी जणै सास भी जणे पशुओं आले ढंग होगे
घर में पड़दा तण्या रहै ठारा बीस मलंग होगे।
कोये लिकड़ै कोये बड़े और दलिया ऊपर जंग होगे
जामण आले भी तंग होगे ठावे इनको राम नहीं।

किसे कै बैल किसे कै भैंस घर आ ग्या बंटवारे मैं।
कोये कोये बरतन भाण्डे ठाके जा बैठा पथवारे मैं।
बूढ़ा बुढ़िया दोनों रोवैं घर..............उसारे मैं
बुढ़िया फिरै जिडाई मरती मैं रात काट रही हारे मैं
इस कुन्बे कै बारे मैं रहया शरीर पै चाम नहीं।

घणा के जिकर करें इन दुनिया की राहियां का
किले पांच हकीकी ठारा संग मैं हक जमाइयां का
धरती बांटैं न्यारे हो ज्यां बांगड़ बाजै भईयां का
एक ओर नै बूढ़ा खड़या लखावै तोड़या औड़ तगाईयां का
समझणियां की मर हो गई मानै कोई गुलाम नहीं।

बुढ़ा बुढ़िया न्यों बतलाये के सुख हुआ पूतां का
जामे और पढ़ाये लिखाए गुह मूत कर्या ऊतां का
इस तै अच्छा तै बांझ भली थी यो लहन्डा ना होता कुतां का
बुढ़ा बुढ़िया दोनों चाल पड़े यो कुनबा छोड़ दिया सूतां का
कहैं मेहर सिंह जाट कपूतां का रहना चाहिये नाम नहीं।

कोई टिप्पणी नहीं:

loading...


Free App to Make Money




Free recharge app for mobile
Click here to download

All Posts

Blogger द्वारा संचालित.