गऊ कहाया करते थे भारत के लोग लुगाई Gau kahaya karte the bharat ke log lugayi

पहले समय में हमारे देश में आपसी भाईचारा हुआ करता था, हर व्यक्ति एक दुसरे व्यक्ति का सम्मान करता था, यदि किसी पर कोई आपत्ति आती थी तो सभी उसका सहयोग करते थे और एक उजड़े परिवार को सहारा देकर उसे फिर से बसा देते थे लेकिन आज सब कुछ बदल कर विपरीत हो गया है, आइये जाने कैसे......

गऊ कहाया करते थे भारत के लोग लुगाई,
जोंक, भेडिये, मगरमच्छ अब देते नाग दिखाई...

बण कै जोंक लहू चूसैं यें साहूकार देश के,
भूखे नंगे फिरैं बेचारे ताबेदार देश के ...
कोठी बंगलां म्हं रहते असली गद्दार देश के,
आंख मीच के सोग्ये सारे पहरेदार देश के...
भरैं तजूरी ठोक ठोक करैं अन्धां धुन्ध कमाई....
जोंक, भेडिये, मगरमच्छ अब देते नाग दिखाई...

बणे भेड़िये भारत के यें परमट कोट्यां वाळे
नाम करा कै डिपू रूट दिन धौळी पाड़ै चाळे
मीठी मीठी बात करैं यें पर भीतर तै काळे
अफसर और वजीरां के झट बणैं भतीजे साळे
बकरी भेड़ समझ निर्धन नै करज्यां तुरंत सफाई..
जोंक, भेडिये, मगरमच्छ अब देते नाग दिखाई... 

रिश्वतखोर मगरमच्छ बणगे खावैं ऊठ ऊठ कै
जै मिल ज्या मजबूर दुखी कोय पड़ते टूट टूट कै
लाखां के मालिक बणग्ये, लोगां नै लूट लूट कै
बिन रिश्वत ना काम करैं चाहे रोल्यो फूट फूट कै
आठों पहर रहैं मुंह बायें पापी नीच कसाई...
जोंक, भेडिये, मगरमच्छ अब देते नाग दिखाई... 

काळे नाग बणे जहरी यें बड़े बड़े व्यापारी
चीनी तेल नाज घी लोहा कर लें कट्ठा भारी
फण ताणे बैठे रहैं भूखी मरज्या दुनिया दारी
चढ़ज्यां रेट शिखर म्हं जब यें जिनस काढ़ दें सारी
“ज्ञानी राम इन चार जणां नै कर दी घोर तबाही...
जोंक, भेडिये, मगरमच्छ अब देते नाग दिखाई...  

गऊ कहाया करते थे भारत के लोग लुगाई,
जोंक, भेडिये, मगरमच्छ अब देते नाग दिखाई...

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