एक रात के बिछड़ने तै दो पक्षी काल हो लिए Haryanvi folk song bichhdane ka dard

प्रिय दोस्त, दो प्रेमियों की जुदाई का कवि ने कैसे वर्णन किया है अंजना के किस्से की इस रागनी को पढ़कर जानिए.....

एक रात के बिछड़ने तै दो पक्षी काल हो लिए
मनै अंजना गौरी का मुँह देखे, ग्यारा साल हो लिए...टेक

शादी करकै मुँह देख्या ना, यो मोटा गुनाह सै
मनै बात तलक कोन्या बूझी, जिस दिन तै होया ब्याह सै
वा क्यूकर डटती होगी अंजना साल ग्यारवां जा सै
जब पक्षी इतना प्रेम करैं, उस अंजना का के राह सै
हाँसी खेल पति बिन डटणा जुलम कमाल हो लिए...

हुए ग्यारह वर्ष रही गरीब तरस, दुख गात फुँकता होगा
मनैं बोहत सताई अंजना ब्याही का ब्रह्म दूखता होगा
ओढ़ण-पहरण न्हाण-खाण का टेम ऊकता होगा
रो-रो कै आख्यां का पाणी, रोज सूखता होगा
ईब चलकै भरणे चाहिए, जल बिन खाली ताल हो लिए...

किस्मत की माड़ी, करै धौली साड़ी, ना देखे चीर जरी सै
हँसली, कण्ठी, हार नार की सारी टूम धरी सै
जित मौके पै पाणी घलज्या, वे इब लग खुद हरी सै
मची हरियाली एक ना खाली, सब की गोद भरी सै
अंजना के साथ की बीरां कै तै, कई-कई लाल हो लिए...

कहै ‘दयाचन्द’ दुख भरै बीर, इसे मर्द कसाई धोरै
कदे ना हँस कै नार प्यार तै मनै बुलाई धोरै
मैं अंजना तै दूर रहूँ, सब लोग लुगाई धोरै
याड़ै दो दिन फौज डाट मंत्री मैं जांगा ब्याही धोरै
मनैं जो अंजना तै बचन भर, वो खत्म सवाल हो लिए...

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