अश्क बिना ईश्क, ईश्क बिना, आशिक, आशिक बिना संसार नहीं - Haryanvi Ragni

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प्रिय दोस्त, कवि ने इस मतलबी संसार का वर्णन कैसे किया है, आइये पढ़ें....

अश्क बिना ईश्क, ईश्क बिना, आशिक, आशिक बिना संसार नहीं
शर्म बिन लाज, लाज बिन मतलब, मतलब बिन कोए यार नहीं।टेक

धन बिन दान, दान बिन दाता, दाता बिन जर सुन्ना है
सत बिन मर्द, मर्द बिना तिरया, तिरया बिन घर सुन्ना है
रण बिना सूरा, सूरे बिना तेगा, तेगे बिन कर सुन्ना है
तप बिन कर्म, कर्म बिन किस्मत, किस्मत बिन नर सुन्ना है
हठ बिन हार, हार बिन हाणी, हाणी बिन हुश्यार नहीं।

शशि बिन रैन, रैन बिन तारे, तारां बिन गगन सुन्ना है
मोह बिन मेर, मेर बिन ममता, ममता बिन मन सुन्ना है
गुल बिन बाग, बाग बिन बुलबुल, ये सब गुलशन सुन्ना है
रंग बिन रूप, रूप बिन जोबन, जोबन बिन तन सुन्ना है
हक बिन हुक्म, हुक्म बिन हाकिम, हाकिम बिन हकदार नहीं।

मन बिन मेल, मेल बिन प्यारा, प्यारे बिन दो बात नहीं
जर बिन जार, जार बिन जारी, जारी बिन उत्पात नहीं
छल बिन द्वेश, द्वेश बिन कातिल, कातिल बिन कुलघात नहीं
सजनी बिन साजन, साजन बिन सजनी, सजनी रह एक साथ नहीं
दुःख बिन दर्द, दर्द बिन दुखिया, दुखिया बिन पुकार नहीं।

मोह बिन काम, काम बिन क्रोध, क्रोध बिन अभिमान नहीं
गुण बिन कदर, कदर बिन शोभा, शोभा बिन सम्मान नहीं
भजन बिन भगत, भगत बिन भगति, भगति बिन कल्याण नहीं
सुर बिन साज, साज बिन गाणा, गाणे बिन तुकतान नहीं
गुरु बिन ज्ञान, ज्ञान बिन मेहरसिंह, दहिया का सत्कार नहीं।
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