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27/08/2016

करकै घायल तड़फती छोड़ी - हरयाणवी रागनी Karke ghal tadapti chhodi - ragni

प्रिय दोस्त, फौजी हमारे देश के पहरेदार है वो स्वयं को जोखिम में डालकर हमारी रक्षा करते है, उन्हें अपने बीवी बच्चों से महीनों तक दूर रहना पड़ता है, जब उन्हें छुट्टी मिलती है तो वो अपने परिवार से मिलने घर आते है और छुट्टी पूरी होते ही वापिस अपनी ड्यूटी पर चले जाते है, एक फौजी की पत्नी इसका कैसे वर्णन करती है इस रागनी से पढ़ें...
 
करकै घायल तड़फती छोड़ी तूं ज्यान क्यूंना काढ़ लेग्या
हो परदेशी गैल मेरे तूं बांध क्यूंना हाड लेग्या।टेक

सारा कुणबा छोह मैं आवै सासू दे सै गाल मेरी
ओर किसे का दोष नहीं या छोटी नणद कराल मेरी
ओढण पहरण पीण खाण की कती छूटली ढाल मेरी
हो परदेशी तनै आकै नैं क्यूं ना लई सम्हाल मेरी
तूं चंदा बणकै दरस्या कोन्या क्यूं बादलां की आड़ लेग्या।

शक्कर पारे गिरी छुआरे और सुहाली देशी घी की
घर घर के म्हं चालू होरी लाड़ कोथली बेटी धी की
हे ईश्वर मेरी ज्यान बचादे दुनियां लख चौरासी जी की
सारा सामण उतरग्या खाली दुनिया बाट देखरी मीहं की
सूखी तीज मनाऊं क्युकर मींह का मौका साढ लेग्या।

परदेशों तैं चिट्ठी आई चिट्ठी तेरी फौज की थी
चिट्ठी के म्हां न्यूं लिख राखी छुट्टी बीस रोज की थी
चौदस पूर्णमासी पड़वा तेरी पक्की बाट दौज की थी
सब कुणबे कै चाव चढ़या मेरी वाहे रात मौज की थी
रंग चा हो सै गैल सजन की तूं घाल गोझ मैं लाड लेग्या।

भरती हूंगा भरती हूंगा या हे आस बदन में थी
और किसे का दोष नहीं सूरती गौरमन्ट के अन्न म्हं थी
कुछ तो जोर करया करमां नैं कुछ तेरै भी मन म्हं थी
भरती होण की तिथि पिया तेरी उस 37 के सन् म्हं थी
घर कुणबे तैं दूर मेहरसिंह तनैं भरती का चाढ़ लेग्या

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