0
प्रिय दोस्त, इस रागनी के माध्यम से कवि बतलाना चाहता है कि हर किसी की किस्मत अलग - अलग होती है, दुनियां में हर किसी का होना जरुरी है, सबका अपना - अपना महत्त्व है, इन्सान हो या वस्तु सब महत्वपूर्ण है, हमें अपने आपको ज्यादा बड़ा नहीं समझना चाहिए, आइये इस रागनी से जानकारी लें....

सोना कहण लगा लोहे तै तू सब धातां में काला
काला सूं तै के होग्या दुनियां में मेरा उजाला।टेक

गुट्ठी छल्ले बणैं मेरे मेरी फरकै मोर नाथ कै म्हा
रण कै म्हां तलवार चालती रहती मूठ हाथ कै म्हा
कठला कंठी मेख बणैं मेरी धरी जा चौंप दांत कै म्हा
बरमा मेरा मेरी हथोड़ी रहती उड़े साथ कै म्हां
हार मेरा सिंगार मेरा मेरी गल में मोहन माला
अड्डा कैंची बणै मेरे मेरा कठला बल वाला।

नई बहु नै टूम पहरादे बणज्या नार छबीली
राखड़ी कै म्हां छल्ला पड़ै बणज्या नार रंगीली
हंसला हंसली बर्ण मरे मेरी बणै नाक की तीली
अैहरण मेरी हथौड़ा मेरा नश पीट बणा दुं ढीली
घुंघट कै म्हा मेरा आवै बोरला न्यूं कटज्या सै चाला
तनै राखूं कैद अपणी में लगै ट्रंक कै ताला।

मामा नाना भात भरै दें नथनी चून्नी चोला
मेरी सूई टंगै मोड़ पै पड़ज्या रूक्का रोला
ईब जंग की तेजी हुई बिका एक सौ बीस का तोला
जहाज बर्ण मेरे टैंक बणै बणै बम्ब का गोला
तेरे बम्ब के गोलां नै मर्दां का कर दिया घाला
जित तूं कठा होज्या सै उड़ै डाका पड़ै सुखाला।

जिस घर में बास मेरा उस में घी का दीपक बलता
मेरे तवै बिन सारा कुणबा हांडै पेट मशलता
चुपका होज्या सोने मैं कहें बिना ना टलता
खुरपी दांती फाली बणै मेरे बिन हल ना चलता
तूं थोथा चना बाजै घणा कर दे बोलण का टाला
कहै जाट मेहर सिंह हुया फैंसला लोहा जीतग्या पाला।

एक टिप्पणी भेजें

 
Top