आम की खेती करने का आधुनिक तरीका Aam ki kheti karne ka aadhunik tarika

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आम जिसे की भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में फलों के राजा के रूप में माना जाता है। और इसका गुण भी इसमें है। आम एक ऐसा फल है जिससे की कई प्रकार के फ्रूट जूस तैयार किये जाते साथ में कोल्ड ड्रिंक भी तैयार किये जाते हैं और आम का उपयोग आचार बनाने मसाला बनाने जैली सिरप पेय आदि के रूप में किया जाता है।

आम एक ऐसा फल है जिसमे की अन्य फलों के अपेक्षा अधिक मिठास होती है। ये इनके किस्म पर निर्भर करता है। शायद आपको न पता हो की आम का विकाश हजारो वर्ष पहले दक्षिण एशिया में किया गया था जो की बाद में पूरे एशिया और विश्व में फ़ैल गया। भारत में आम सबसे अच्छे फलों में से एक है। इसीलिए आम की माँग पुरे भारत में बहुत बड़े स्तर पर है। इसीलिए आम की खेती आज के समय में एक फायदे का व्यापार हो गया है। गर्मी के समय में आम की मांग बहुत ज्यादा मात्रा में होती है। अगर आप आम की खेती करना चाहते हैं तो इसमें आपको फायदा ही फायदा है। आप आम की खेती छोटे स्तर पर भी कर सकते हैं और बड़े स्तर पर भी। आम का बिज़नेस अन्य व्यापार से अच्छा है क्योंकि इसमें ज्यादा लागत भी नहीं आती और एक बार इसके पौधों पर अच्छे तरीके से ध्यान दे दिया जाय तो ये सालों तक हमें लाभ देते रहते हैं। 

आम की खेती के लिए जलवायु- अगर आम की खेती के लिए जलवायु की बात की जाये तो आम की खेती उष्ण और समशीतोष्ण दोनों प्रकार की जलवायु में किया जा सकता है। मुख्य रूप से आम की खेती वर्षा आधारित क्षेत्रों में जुलाई से अगस्त के महीने में की जाती है। तथा सिंचित क्षेत्र में फरवरी से मार्च के समय की जाती है। जिन क्षेत्रों में वर्षा बहुत अधिक मात्रा में होती है वहां आम की खेती वर्षा ऋतु के अंत में की जानी चाहिए।

आम की खेती के लिए भूमि- आम की खेती करने के लिए अगर भूमि की बात करें तो इसे सभी प्रकार की भूमि पर उगाया जा सकता है। आम की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है। आम की खेती अधिक बलुई क्षारीय पथरीली जल भराव वाली भूमि में अच्छी तरीके से नहीं की जाती। इसलिए आप आम की खेती करने से पहले इन सब बातों पर ध्यान दें।

आम की कुछ प्रजातियां- आइये आम की कुछ प्रजातियों के बारे में भी जान लेते हैं जो इस प्रकार से हैं- दशहरी , लगड़ा , चौसा , तोतापरी , बॉम्बे ग्रीन फजरी , अलफांसो , बनराज , किशन भोग , नीलाम आदि अनेक प्रजातियां हैं।

आम की खेती के लिये गड्ढे की तैयारी- जब हम आम की खेती करते हैं तो हमे क्या क्या करना चाहिए इसकी जानकारी यहाँ दी गयी है। आम जी खेती के लिए उपयुक्त समय वर्षा का समय माना जाता है। और जिन स्थानों पर वर्षा बहुत अधिक मात्रा में होती है वहां पर आम की खेती वर्षा ऋतू के अंत में करना चाहिए। आम की खेती के लिए सबसे पहले गहरा गड्ढा खोद कर उसमें 30 से 40 किलो अच्छी सड़ी हुयी गोबर की खाद मिला लेना चाहिए और एक गड्ढे से दूसरे गड्ढे की दुरी 10 से 12 मीटर की होनी चाहिए ताकि जब पौधे बड़े होने लगे तो उनके विकाश में कोई बाधा न उतपन्न हो। अगर आप आम्रपाली किस्म के पौधे लगाना चाहते हैं तो यह दुरी 2.5 मीटर से लेकर 3 मीटर बहुत है। वैसे गड्डों की दुरी पौधे के किस्म पर निर्भर करता है। जब गड्ढे में गोबर की खाद मिला ली जाती है तो उसमें क्लोरोपैरिफास पाउडर मिलाकर गड्डों को बंद कर देना चाहिए गड्डों की खुदाई और खाद मिलाने का काम मई के महीने में करना चाहिए।

आम की खेती के लिए पौधे तैयार करना- आम की खेती के लिए बीजू पौधे तैयार करने के लिए आम के गुठलियों की बुआई जून या जुलाई के महीने में कर दी जाती है या फिर भेट कलम , विनियर , साफ्टबुड ग्राफ्टिंग द्वारा भी आम के अच्छे किस्म के पौधे तैयार किये जाते हैं। 

आम के लिए खाद- नाइट्रोजन फास्फोरस पोटास 100 ग्राम प्रति पेढ़ जुलाई के महीने में देनी चाहिए। इन खादों को पौधे के चारों तरफ बने नालियों में देना चाहिए। खाद देने का यह काम तबतक करना अच्छा होता है जब तक की पौधे 10 साल के नहीं हो जाते हैं। इसके अलावा मृदा को मजबूत बनाने हेतु 25 से 30 किलो गोबर की खाद प्रति पौधा देना चाहिए इससे मिट्टी के भौतिक और रासायनिक दशा में सुधार होता है। और साथ में 250 ग्राम एजोसपाइरिलम को 35 से 40 किग्रा अच्छी साड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर आम के थालों में देना चाहिए जिससे की आम की उत्पादन क्षमता बढ़ती है। 

आम की खेती के लिए खरपतवार नियंत्रण- आम की खेती अगर आप व्यवसाय के लिए करना चाहते हैं तो आपको आम के बाग में वर्ष में 2 बार जुताई कर देनी चाहिए। जिससे की उसमे खरपतवार घास फूस भूमिगत किट आदि नष्ट हो जाते हैं। आम के बाग को हमेशा साफ रखना चाहिए। और आम के थालों में बिल्कुल गंदगी हो इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए। 

आम की खेती के लिए सिंचाई का समय- आम के पौधे जब लगा लिए जाते हैं तो उनकी सिंचाई की बारी आती है। आम की खेती में सिंचाई का अलग ही स्थान है। इससे पौधे सदा हरे भरे रहते हैं। और उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है। आम के पौधे लगाने के बाद एक वर्ष तक 3 से 4 दिन के अंतराल पर आवश्यकता अनुसार सिंचाई करना चाहिए। जब पौधे में फल लगने लगे तो 3 से 4 सिंचाई अवश्य करनी चाहिए। आम के पौधों में सिंचाई के लिए आप आम के पौधे के चारों तरफ थाले बना सकते हैं ताकि पौधों को पानी भरपूर मात्रा में अच्छे तरह से मिल सके। यहां पर एक बात का ध्यान दें जब पौधों में फूल लगते हैं तो उस समय 2 से 3 महीनों तक सिंचाई नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसा न करने पर आम के फलों की किस्म में खराबी आ सकती है। और जो पौधे फल दे रहें हैं उनकी सिंचाई 10 से 12 दिन के अंतराल पर करना उचित होता है। 

आम के पौधों की देख रेख- जब आम के पौधे लगा लिए जाते हैं और धीरे धीरे उनका विकाश होने लगता है तो उनकी देख रेख अच्छी तरह से करना चाहिए। इस समय हमें ध्यान रखना चाहिए की पौधों पर कोई किट न लगे वे सही आकार में बढ़े। अगर किसी पौधे के आकार में गड़बड़ी दिख रही हो तो उसके नीचे के डाल काटकर हटा दें और साथ ही हर में 6 से 7 महीने बाद पौधों के आस पास की मिट्टी की गुड़ाई कर देनी चाहिए ताकि हवा और नमी पौधे के जड़ में जा सके। 

आम में लगने वाले रोग और उनसे बचाव- आम के पौधे में कई प्रकार के रोग लगते हैं अगर सही समय पर पहचानकर इन्हें दूर न किया गया तो उसके उत्पादन क्षमता पर विपरीत असर पड़ता है। यह देखा गया है कि आम के पौधे में जब फूल लगता है और खासकर जिनपर फल लगने सुरु हो जाते हैं। तो कई प्रकार के किट लग जाते हैं। जैसे- mealy bug एक ऐसा किट है जो की दिखने में सफ़ेद रुई की तरह होता है। इसका आकार भी छोटा होता है। अगर समय पर इस प्रकार के किट पर नियंत्रण न किया जाय तो ये पुरे बाग के पौधों में फ़ैल जाते हैं। Fruit fly किट का दिखने में मक्खी की तरह होता है। ये अपने झुण्ड में आम पर आक्रमण करते हैं जो की उत्पादन क्षमता घटाने के कारण हैं। इन कीटों से बचाव के लिए आप (monocrotophos) मोनोक्रोटोफोस , (phosphamidon) फोस्फमिडों , methyl Parathion मिथाइल पेराथियोन , carbaryl कारबॉयल को मिलाकर आम के पौधों पर हल्का सा छिड़काव करना चाहिए। आम में भुनगा फुदका किट से बचाव के लिए 0.3 मिलीलीटर एमिडाक्लोरपिड को एक लीटर पानी में मिलाकर पौधे में फूल लगने से पहले छिड़काव करना चाहिए। जब फल मटर के दाने की तरह हो जाये तो 4 से 5 ग्राम कारबॉयल एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। आम के छालों को खाने वाली सुंडी किट तथा तना भेदक किट से बचाव के लिए मोनोक्रोटोफास 0.5 % रसायन के घोल में रुई को डुबोकर पौधों के ताने में हुए छेद में डालकर छेद को बंद कर देना चाहिए ऐसा करने से इनसे बचा जा सकता है। आम के पौधों में लगने वाले गुझिया किट से बचाव के लिए दिसम्बर महीने के पहले या दूसरे सप्ताह में आम के तानो के इर्ध गिर्ध जुताई करके 200 से 250 ग्राम क्लोरोपईरीफ़ास का चूर्ण तने के चरों तरफ छिड़क देना चाहिए। यदि कीटों का आक्रमण पौधों पर हो चूका है। यानि किट पौधों पर चढ़ चुके हो तो 0.3 मिली लीटर एमिडाक्लोरपिड को एक लीटर पानी में मिलाकर जनवरी के महीने में 10 से 15 दिन के अंतर पर पौधों पर छिड़काव करना चाहिए। आम में गुम्मा विकार या माल्फर्मेशन रोग से बचाव के लिए जिन आम के पौधों पर इनका असर कम है उनके बौर को तोड़ देना चाहिए ये काम आप जनवरी या फरवरी माह में कर सकते है।जिन पौधों पर इनका असर ज्यादा हो उनके लिए एन.ए.ए. 200 पी. पी. एम्. रसायन की 900 मिली लीटर 200 लीटर पानी घोलकर छिडकाव करना चहियेI आम के बागो में कोयलिया रोग से बचाव के लिए 10 ग्राम बोरेक्स या कास्टिक सोडा एक लीटर पानी में घोलकर फल लगने पर एक छिड़काव करना चाहिए तथा दूसरा छिडकाव 15 से 20 दिन के अंतर पर करना चाहिए ऐसा करने से फल खराब होने से बच जाते हैं। 

आम के फलों को तोड़ना- सबसे अंत में आम के फलों को तोड़ने का समय आता है। आम के फलों को जब तोड़ा जाता है उनको 10 से 12 मीमी लम्बी डंठल के साथ तोड़ना चाहिए ऐसा करने से फलों पर स्टेम राट बीमारी से बचा जा सकता है। आम के फलों को तोड़ते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की फलों में चोट या खरोच न लगे जिन फलों में ऐसा हो जाता है उन्हें अलग रखना चाहिए। 

आम की उपज- आम के फलों की उपज कुछ हद तक जलवायु पर निर्भर करता है। अगर सबकुछ सही रहा तो आपको अच्छी मात्रा में फल प्राप्त होते हैं। ऊपर बताये गए तरीकों को ध्यान में रखकर अगर आप आम की खेती करते हैं तो आपको 250 से 250 किलो प्रति पेढ़ फल प्राप्त हो सकते हैं। वैसे यह आम के किस्म और पौधे पर निर्भर करता है।

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