गन्ने की खेती वैज्ञानिक तरीके से कैसे करे Ganne ki Kheti vaigyanik tarike se kaise karen

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कृषि वैज्ञानिको द्वारा गन्ने की खेती के लिए गहरी दोमट भूमि सबसे best मानी जाती है। भूमि की जुताई 40 से 60cm तक गहरी करनी चाहिए क्योंकि 75% जड़े इसी गहराई पर पाई जाती है । खेती शुरु करने से पहले भूमि की जुताई कर उसे भुरभुरा बना लें फिर उसपर पाटा चला कर उसे समतल बना लें । गन्ने की खेती के लिए खेत को खरपतवार से दूर रखना जरुरी है । खेत की आखिरी  जुताई करने से पूर्व 10-12 ton प्रति एकड़ गाय की सड़ी हुई गोबर की खाद को भूमि में मिला देना चाहिए ।

जलवायु  और बुआई का समय - गन्ने की अच्छी बढ़ोतरी के लिए लम्बे समय तक गर्म और नम मौसम साथ हीं अधिक बारिश का होना best होता है । गन्ने की बुआई के लिए temperature 25 से 30 डिग्री से. होना चाहिए । October से November का महिना गन्ना लगाने का सबसे सही समय होता है । इसके अलावा February से march में भी गन्ने की खेती की जा सकती है । गन्ना 20 से 25 डिग्री से. तापमान पर अच्छा पनपता है ।

खाद प्रबंधन - गन्ने की अधिक उत्पादन के लिए प्रति hectare 300kg नत्रजन(nitrogen), 80kg स्फूर (Phosphorus)  और 60kg पोटाश(potash) की अव्यश्कता होती है । नत्रजन को तीन बराबर भागो में मतलब प्रतेक भाग में 100kg अंकुरण के वक्त या फिर बुआई के 30 दिन , 90 दिन और 120 दिन के बाद खेत में डाल देना चाहिए और फिर फसल पर मिट्टी चढ़ा देना चाहिए । स्फूर (Phosphorus) और पोटाश(potash) की पूरी मात्रा गन्ना लगाते समय हीं खेत में दे देनी चाहिए ।

सिंचाई / जल प्रबंधन  - गन्ने की खेती में गर्मी के दिन में 10 दिन और ठंड के दिन में 20 दिन के Interval पर खेत की सिंचाई करनी चाहिए। फवाड़ा विधि से सिंचाई करने पर उपज में वृद्धि होती है साथ ही पानी की बचत भी होती है। गन्ने की फसल को लगाने के 10 से 15 दिनों के बाद खेत में बनी पपड़ी तोड़ना बहुत अव्यश्क होता है इससे अंकुरण जल्दी होता है ओर खरपतवार भी कम आते है। गन्ने की फसल को गिरने से बचाने के लिए गुड़ाई कर के 2 बार फसल पर मिट्टी डाल देना चाहिए और गन्ने की पत्तियों को आपस में बांध देना चाहिए ।

रोग व किट नियंत्रण - गन्ने के बीज को नम गर्म हवा से उपचारित करने पर वे रोग रहित हो जाते है । फसल को रोगों से बचाने के लिए 600g डायथेम एम. 45 को 250 लीटर पानी के घोल में 5 से 10 मिनट तक डुबाना चाहिए। रस चुसने वाले कीड़ो का प्रकोप गन्नो पर ज्यादा होता है इसलिए इस घोल में 500ml मिलेथियान भी मिलाया जाना चाहिए । गन्ने के टुकड़ो को लगाने से पहले मिट्टी के तेल और कोलतार के घोल में दोनों सिरो को डूबा कर उपचारित करने से दीमक का प्रकोप कम हो जाता है ।

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